मई 2017
अंक - 26 | कुल अंक - 53
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

क्षणांश-पुष्प

मैं हर बार कुछ क्षण बचा लूँगा

चाहे कोई व्यवस्था
कितने भी विविध कार्य एक साथ देती रहे,
सब कुछ निष्ठापूर्वक, नियत समय में पूर्ण होगा
क्योंकि, दो क्षणों के बीच भी कुछ है
वह मैं बचा लूँगा

सोच लूँगा
अपनी तरह से,
क्योंकि मैं तब भी हूँ
जब दो क्षण
प्रवाह में विसर्जित हो रहे, लड़ी बनाकर
ठीक अभी की तरह
और ठीक उसी तरह
जिस तरह दो साँसों के खाली स्थान में भी
मैं हूँ
और यह, मैं बचा लेता हूँ
हर बार, बार-बार

देखता हूँ
ये शेष क्षणांश
बड़ी बारीकी से तब्दील हो रहे
एक अदृश्य पुष्प में
जिसमें महक है साँसों का अंतराल

जानती हो तुम
यही पुष्प हर शाम
घर लौट
भेंट करता हूँ तुम्हें
अपनी मुसकराहट की माला में पिरोकर


***************************


ताकि जब मिलूँ तुमसे

भीड़ से बचा लाया हूँ
साफ कपड़े
ताकि धोने में तुम्हें तकलीफ न हो
नीड़ तक बचा आया हूँ
पाक नजरें
ताकि जब मिलूँ तुमसे
तो तुम्हीं से मिल सकूँ

शहर में फैली गर्द से
बचा लाया हूँ
स्वस्थ शरीर और रोग प्रतिरोधक क्षमता अपनी
ताकि शुद्धता और स्वस्थता में
हो सकूँ साथ तुम्हारे

फिर लौटती ठंडी से बचा लाया हूँ
अपने चेहरे की रंगत वही
ताकि जब मिलूँ तुमसे
तो अजनबी-अजनबी सा न लगूँ

ट्रेन के घरघराते शोर में भी
बचाये रखा हूँ
दिलो-दिमाग़ की शांति
कि जब मिलूँ तुमसे
तो ठीक वैसे ही मुस्काते मिल सकूँ
जब हम पहली बार मिले थे

ट्रेन की पटरी में दूर तक पसरे गिट्टी से भी
बचा लाया हूँ
सही सलामत पैर
ताकि मोच का दर्द ही दूर करते
न बीत जाए समय तमाम

अजनबी यात्रियों की ऊटपटाँग बातों से
बचा लाया हूँ
अपनी अभिव्यक्ति की शक्ति वही
ताकि कह सकूँ वही, उसी क्रम में
जो कहना चाहता हूँ तुमसे

उनकी ही अजीबो-गरीब गंध में
कम साँस लेते भी
बचा आया हूँ
अपनी घ्राण शक्ति
ताकि तुम्हारे होने की महक में हो सकूँ पूर्ण

भीड़ में जाने-अनजाने
छूए जाने से बचाए रखा अपनी त्वचा
ताकि बनी रहे शुचिता, उस स्तर तक
जिस स्तर पर हो
तुम्हारे साथ होने का आदी हूँ

ट्रेन के लगातार बजते हार्न से
अब भी बचे हैं मेरे कान जीवित
सुनने, दो अक्षरों के बीच तुम्हारे साँसों का विस्तार

इस तरह बनाये रखा है
अपना ऊर्जा स्तर
कि जब जीयूँ
तो पूरी तरह जी सकूँ
साथ तुम्हारे।


- सुजश कुमार शर्मा

रचनाकार परिचय
सुजश कुमार शर्मा

पत्रिका में आपका योगदान . . .
कविता-कानन (1)