हस्ताक्षर रचना
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मार्च 2017
अंक -41

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

बहुभाषी काव्यसंध्या का आयोजन

मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के सौजन्य से काव्यमंच, जोधपुर द्वारा रविवार 5 फरवरी 2017 को एक बहुभाषी काव्यसंध्या का आयोजन मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के पसिसर में किया गया। प्रारंभ में मंच के अध्यक्ष शैलेन्द्र ढड्ढा ने संस्था का परिचय देते हुए मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी के अधिकारी मोहम्मद अतीक का युवा कवियों को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। मुख्य अतिथि जाने माने गीतकार दिनेश सिंदल ने 'मिल कर गाये हम वन्दे मातरम' और 'देश में पोपाबाई का राज' जैसी लोकप्रिय रचनाएँ सुनाकर धूम मचा दी।

अध्यक्ष डॉ. पद्मजा शर्मा ने 'कैसे होगी खूबसूरत दुनिया/ इसमें रहती है लड़की डरी-डरी' जैसी मर्मस्पर्शी रचना सुनाकर माहौल को भावुक कर दिया। गोष्ठी का प्रारंभ युवा कवि विकास राज भाटी ने वीर रस की रचना 'रंग रूप चन्दन और वंदन शौर्य भोम दीवानी का/ नग्न नहीं पूजनीय है किरदार पद्मिनी रानी का' से किया। गीता व्यास ने 'ओस खुशबू गुलाब जैसी हूँ/ शायरी की किताब जैसी हूँ', सुनीता चौधरी ने 'अपनी सी लगती है मेरे गाँव की पगडंडियाँ', चन्द्रभान विश्नोई ने 'आओ मिले कुछ इस तरह मिलती है सूर्य रश्मि सृष्टि में जिस तरह', अमजद 'अहसास' ने 'मौसम ये एक चीख का है/ बैठो मत खामुशी सजाये' और वाजिद हसन काजी ने 'सुपणा कदैई टूट सके है/ सांस कदैई छूट सके है' जैसी रचनाएँ सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

वरिष्ठ कवि श्रवणदान शून्य ने 'ये दादी का तजुर्बा है किताबों में नहीं मिलता', महावीर सिंह ने 'मातृधरा की पावन मिट्टी', फानी जोधपुरी ने 'तेरे रस्मों रिवाजों सा ए दुनिया हो नहीं सकता/ मैं पत्थर था मैं पत्थर हूँ शीशा हो नहीं सकता', कमलेश तिवारी ने 'ठुमकने लगता है एक हरिमल शिशु मन के आँगन पर', अशफाक अहमद फौजदार ने 'गर दिल के जख्म सताये तो ग़ज़ल कहे/ अपने पराये बन जाये तो ग़ज़ल कहे’ शहजाद अली ने 'बहुत आसां है रफाकत की राहें/ पानी देते रहना जड़ें काटते जाना, मधुर परिहार ने 'धार पर तलवार के तुम्हें चलना है सुन/ फिर भी सपने बुन मेरे मन तू सपने बुन', शैलेन्द्र ढड्ढा ने 'कुछ बातें समझ न आये तो अच्छा है/ बिन बोले काम चल जाये तो अच्छा है' और अनिल अनवर ने 'कैसे होगी वफ़ा और यकीन की बातें' आदि अनेक रचनाएँ सुनाकर गोष्ठी को साहित्यिक ऊँचाई प्रदान की।

इनके अलावा पूर्ण दत्त जोशी, कल्याण के विश्नोई, रजा मोहम्मद खान, राजेश मोहता, श्याम गुप्ता शांत, शाहबाज, गणेश देवासी आदि ने भी सुन्दर रचनाएँ पेश की। गोष्ठी में कुल पाँच भाषाओं हिंदी, उर्दू, राजस्थानी, अंग्रेजी और बांगला में काव्य पाठ हुआ, जिस दौरान श्रोताओं ने जम कर दाद दी।
इस अवसर पर माधव राठौड़, ए.आर.खान, विमल मेहरा, ऋषभ जैन, स्वरुप सिंघल, दिनेश शर्मा, अरुण राजपुरोहित, डॉ. दिनेश टाक, मृदुला श्रीवास्तव, शाहीब रिजवी, एच. ए. खान, अरुण राजपुरोहित आदि गणमान्य नागरिक और साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मधुर परिहार ने किया।



(ख़बर सौजन्य: शैलेन्द्र ढड्ढा अध्यक्ष, काव्यमंच जोधपुर)
 


- सुरेन बिश्नोई