प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
फरवरी 2017
अंक -52

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

उड़ता हुआ सागर

एक सागर था ज़मीन पर
एक था आसमान में
उड़ता हुआ सागर

रूई-सा उतर गया वह
पर्वत पर चुपचाप
अति कठोर पत्थर-सा
जम गया
बन गया बर्फीस्तान

ताकि बहती रहें नदियाँ
टूटते हैं जैसे तट-बंध
टूटती रहें परंपराएँ
और नवनिर्मित हों सभ्यताएँ
समृद्ध संस्कृति के लिए

फटा जब वह किसी पर्वत पर
चूर हो गए शिखरों के दर्प
बहा ले गया दूर उन्हें कहीं
और बिछा दिए मैदानों में
आत्महत्याओं के ख़िलाफ़
ताकि बची रहे, कृषिकारिता

उतरा जब वह किसी जंगल में
गाँवों में और शहरों में
डूब गया सबकुछ
फिर मचा जल-प्रलय का तांडव

बहुतों की पोल खुल गयी
नष्ट हो गया बहुत कुछ
पर भीतर ही भीतर
रच दिए उसने
सृष्टि के नए भंडार

एक सागर था जमीन पर
एक था आसमान में
फैलता हुआ रूई-सा सतरंगी
उड़ता हुआ जीवन।


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और हम मार दिए जाएँगे

कहीं भी, कभी भी, किसी भी देश में
चाहे वह कितना भी बड़ा लोकतांत्रिक देश क्यों न हो
हम मार दिए जाएँगे
और हमारा यह तंत्र
कुछ भी न कर सकेगा।

किसी देश के राजपथ पर जब
मनाया जा रहा होगा कोई राष्ट्रीय जश्न
निकाली जा रही होंगी मनोरम झाँकियाँ
तब संस्कृतियों के महादेश में भी
यह कतई नहीं बताया जाएगा
कि कितनों को छोड़ना पड़ा
अपना-अपना घर-द्वार अपने ही देश में
धर्म, भाषा या प्रांतीय दंगों में
कितनों को करना पड़ा पलायन
और सच बोलने की ख़ातिर
कितनों की ले ली गयी जान।

नहीं बना पाये हैं अब तक
दुनिया में हम कोई ऐसा तंत्र
जिससे हम बचा सकें
एलिन जैसे तमाम उन बच्चों को
जो युद्ध में मारे जा रहे हैं।
रोका जा सके उन दरिंदों को
जो रेत रहे हैं मानवता
और बेच रहे हैं औरतों को।

आने वाली पीढ़ी को मुश्किल से यकीन हो पाएगा
कि इंटरनेट के युग में
जब दुनिया सोशल मीडिया और ह्वाटस् ऐप पर थी
तब दुनिया के किसी हिस्से में ढायी जा रही थी बर्बरता
मंडरा रहा था आतंक का साया पूरी पृथ्वी पर
कि कब कहाँ हो जाये कोई 9/11
या फोले की तरह हमें भी कोई
कहीं बना ले बंधक
और रेत दे गला।




एलिन– तीन-चार साल का एक सीरियाई बच्चा, जिसका परिवार युद्ध के आतंक से समुद्र के रास्ते पलायन कर रहा था, डूब गया। अंतिम समय में उसे अपनी नहीं बल्कि पिता के लिए चिंता थी। वह पापा से कहता रहा- मेरी चिंता मत करो, पापा अपनी जान बचाओ। लहरों ने उसकी लाश को किनारे लगा दिया। मुँह के बल लेटा मासूम एलिन मानो चीख-चीख कर दुनिया से पूछ रहा था- 'यह कौन सी दुनिया है, जिसने मेरे जैसे न जाने कितने बच्चों का यह हस्र किया? इसमें मेरा क्या कसूर था?' एलिन का डूबना मानवता का डूबना है....जो चिंता का विषय है।
फोले– एक अमरीकी पत्रकार, जिसे जिहादियों ने बंधक बना बर्बरता से गला रेत दिया। दुनिया को डराने के लिए उसकी वीडियो बनाई और जारी किया।
9/11– दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी हमला, जो अमेरिका पर हुआ था। आतंक के इस भयावह दर्द को न केवल अमेरिका झेला बल्कि पूरी दुनिया ने झेला।


- जयप्रकाश सिंह बंधु
 
रचनाकार परिचय
जयप्रकाश सिंह बंधु

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