प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
फरवरी 2017
अंक -44

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

व्यंग्य

व्यंग्य लेख- प्रेम का उदारीकरण और दिल का बीमा

प्रकृति का नियम है कि जिस चीज का बार-बार उपयोग होगा, वह घिसकर लघुकाय हो जाएगी और घिसते-घिसते अंतत: समाप्त हो जाएगीI कुछ यही हाल दिल, प्रेम, इश्क, मोहब्बत का हो गया हैI माया नगरी के सितारों ने इन शब्दों को इतना घिस दिया है कि अब ये शब्द अपना अस्तित्व खो बैठे हैंI आदमी के अंदर दिल को खोजना बालू से तेल निकालने के समान हैI अब इसकी आवश्यकता भी नहीं हैI अरे भाई, जब दिल होगा तो वह धड़केगा ही, उसमें संवेदना, भावना जैसे कुछ बेमतलब-बेकार रोग लगे रहेंगेI इन बेमतलब के रोगों को लेकर विकास के फटाफट दौर में टिक पाना मुश्किल होगाI
आनेवाला समय प्रगति का 'एक्सप्रेस वे' होगा, जहाँ हाल-ए-दिल सुनने-सुनाने का समय नहीं होगाI लोग अपने भीतर दिल जैसी फालतू चीज को स्थान नहीं देंगेI यत्र-तत्र-सर्वत्र 'दिल बैंक' खुल जाएंगेI जब दिल की जरूरत पड़ेगी तो लोग बैंक से किराए पर दिल ले लेंगे और जब दिल देने की जरूरत महसूस होगी तो बैंक को किराए पर दे देंगेI यह क्या बात हुई कि मुफ्त में दिल दिया– न  कोई किराया, न कोई अन्य व्यापारिक-मौद्रिक लाभI


भविष्य में यह भी संभव है कि वैज्ञानिकों का अनुसंधान फलीभूत हो जाए और दिल डिब्बाबंद पेय के रूप में बाजार में उपलब्ध हो जाएI टोमैटो सॉस की भांति हार्ट सौस, मोहब्बत की चटनी और इश्क का अचार भी मिलने लगे तो कोई आश्चर्य नहींI अब इश्क भी ग्लोबलाइज होने लगा हैI अमेरिका अब प्रेम, मोहब्बत, दिल इत्यादि का पेटेंट कराने पर विचार कर रहा हैI अब इश्क फरमाने से पूर्व अमेरिका की अनुमति लेनी होगीI प्रेमालाप संबंधी संपूर्ण शब्दावली पर अमेरिका का आधिपत्य होगाI उदारीकरण के इस युग में प्रेमालिंगन नि:शुल्क नहीं, बल्कि सशुल्क होगाI अखिल विश्व में व्यापार समझौता लागू हो चुका हैI इसलिए वैश्विक प्रेम और उदारीकृत दिल का विपणन (मार्केटिंग) अमेरिका करेगा, क्योंकि वह विश्व विजेता और चक्रवर्ती साम्राज्य हैI

भविष्य में लोगों की व्यस्तता और बढ़ने वाली हैI आदमी के पास दिल की गहराइयों अथवा गाँव की अमराइयों में प्रणय गीत गुनगुनाने का समय नहीं होगाI हृदय का आह्वान सुनने अथवा दिल का विनिमय करने के लिए नदी के एकांत तट पर गीत गुनगुनाने एवं मेघ में भीगने का उबाऊ कार्यक्रम बीसवीं सदी को मुबारकI भावी समय में सुविधाओं का 'सुपर बाजार' विकसित होगाI मैरिज ब्यूरो की भांति हर नुक्कड़ पर 'लव ब्यूरो' खुलेंगे, जिसके एजेंट घर-घर घूमकर दिल की 'होम डिलीवरी' देंगेI प्रेम उद्योग भविष्य में सबसे लाभप्रद अंतर्राष्ट्रीय उद्योग बन जाएगा और लाखों लोग इसमें रोजगार प्राप्त करेंगेI अनुराग प्रकट करने के लिए वातायन खोलकर घंटों का आतुर इंतजार! यह तो अनुसंधान का विषय होगाI शोधकर्ताओं के लिए बीसवीं सदी के प्रेमी-प्रेमिका आश्चर्य नहीं, बल्कि शोध के विषय होंगे, जिन्हे 'हम तुमसे प्यार करते हैं' जैसा अति लघु वाक्य बोलने में बरसों बीत जाते थेI

एक दिवसीय क्रिकेट की तरह एक दिवसीय विवाह पद्धति की लोकप्रियता बढ़ेगीI परंपरागत शादी, मंडप, महावर, सात फेरे, लग्न आदि  इतिहास के पन्नों में रह जाएंगेI धोती-कुर्ते की तरह प्रेमी-प्रेमिका और पति-पत्नी बदले जाएंगेI फैक्स और ई-मेल द्वारा प्रणय संदेश भेजना तो आम हो गया हैI भावी पीढ़ी को इस तरह के संदेश भेजने की जरुरत नहीं होगीI महिलाएँ बच्चों को जन्म देना बंद कर देंगी और रोबोट को गोद लेने लगेंगीI नया आचारशास्त्र होगा, नया नीतिशास्त्रI प्रेम की अभिनव परिभाषा होगी, नई उपमाएँ होंगी और उपमान भी नए होंगेI परंपरागत उपमान खारिज कर दिए जाएंगेI सदाबहार प्रेमी अपनी नित नूतन प्रेयसियों के लिए नए-नए उपमानों का प्रयोग करेंगेI मृगनैनी, कमललोचनी, मीनाक्षी आदि आउटडेटेड उपमानों की जगह प्रेमिकाओं को कंप्यूटर नयनी, फैक्सबैनी, रोबोटजननी से संबोधित किया जाएगा I पुराने मुहावरे बासी पड़ जाएंगेI न दिल लगेगा, न टूटने पर प्रेमी-प्रेमिकाओं के आँसुओं की बाढ़ आएगीI दिल की दुनिया न बसेगी, न उजड़ेगी, सदाबहार बनी रहेगीI दिल का बीमा होगा, इसलिए उसकी चोरी का भय नहीं होगा और यदि बीमाकृत दिल की चोरी भी हो गई तो बीमा कंपनियाँ उसका हर्जाना दे देंगीI


- वीरेन्द्र परमार
 
रचनाकार परिचय
वीरेन्द्र परमार

पत्रिका में आपका योगदान . . .
आलेख/विमर्श (4)व्यंग्य (4)यात्रा वृत्तांत (2)