प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मई 2015
अंक -35

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

चिट्ठी-पत्री
'हस्ताक्षर' के लिए, हमें मेल द्वारा और पोस्ट पर मिली चुनिंदा प्रतिक्रियाएँ यहाँ प्रकाशित होंगीं.
अप्रैल अंक पर हमारे पाठक मित्रों के विचार -
 
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला - जब आवरण ही महक रहा है, तो अन्दर तो और भी श्रेष्ठतम रचनाएँ पढने को मिलेगी. आदरणीया प्रीति 'अज्ञात' जी सहित सभी सम्पादक मंडल को इस श्रम साध्य कार्य हेतु बधाई!
 
कवि डी एम मिश्र - हस्‍ताक्षर के अप्रैल अंक के सुरूचिपूर्ण प्रकाशन पर मेरी शुभकामनाऍ स्‍वीकार करें. हर अंक पहले से आकर्षक --पहले से समृद्ध --पहले से बेहतर. यह आपकी सोच का प्रतिफलन और मेहनत का नतीजा है. आगे के भी अंक नये-नये कलेवर के साथ प्रस्‍तुत करेंगे -इस विश्‍वास के साथ- आपका -डॉ डी एम मिश्र
 
नीता पोरवाल - वाह हरीतिमा लिए लुभाती पत्रिका!
ग़ज़ल, गीत, तथ्यपरक लेख ,समीक्षा .. प्रत्येक कॉलम सराहनीय!
इस साहित्य संगम के अथक प्रयास के लिए अनमोल भाई व प्रीति 'अज्ञात' जी को बहुत बधाई!
 
सिराज़ अहमद -  आज ही हस्ताक्षर के इस अंक को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ. बड़ा लुभावना आवरण दिया है, आपने इस अंक को! संपादकीय से शुरू करता हूँ, जितनी भी तारीफ करूँ; कम है! एक ही बार में पूरा पढ़ गया. अच्छे-अच्छे शब्दों के चयन से यह और बेहतर बन पड़ा. बधाई!
रचनाओ की अगर बात करें तो सब एक से बढ़कर एक हैं. ग़ज़लों का जवाब नहीं! लघुकथाएँ मन को छू गयीं, कविताएँ भी अतिसुन्दर हैं. सभी रचनाकारों की बहुत बहुत बधाई! इस बेहतरीन अंक के लिए आप सभी बधाई के पात्र है।
मेरा मानना है कि थोड़ी सी जगह अगर बालसाहित्य को भी इसमें मिल जाए तो इस पत्रिका में चार चाँद लग जाएँगे! बार पुनः आप सभी को हार्दिक बधाई!
 
आरती तिवारी - 'हस्ताक्षर' पत्रिका का अभी अप्रैल का अंक देखा. ग़ज़ल, नवगीत, लघुकथाएँ "ईर्ष्या" जिस सुन्दर ताने बाने में बुनी हुई है; कुशल गढ़न है.नीता पोरवाल व् प्रीति सुराना की कवितायेँ सम्मोहित करती हैं. संपादकीय की बुनावट अत्यन्त सुन्दर शिल्प में कथ्य को पठनीय व् सराहनीय बना गई है. एक अच्छी साहित्यिक पत्रिका के प्रकाशन हेतु बधाई!
 

- सुरेन बिश्नोई