जनवरी 2017
अंक - 22 | कुल अंक - 54
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

डॉ. ज़िया-उल-हसन क़ादरी की पुस्तक 'मारवाड़ में उर्दू' का विमोचन
 



डॉ. ज़िया की बहुप्रतीक्षित पुस्तक 'मारवाड़ में उर्दू' का विमोचन दिनांक 5 जनवरी, 2017 को होटल मरुधर हेरिटेज के विनायक सभागार में श्रीमती कमला कोचर के सानिध्य में दोपहर 12 बजे बीकानेर तथा राजस्थान भर से तशरीफ़ फ़रमा उर्दू शख्सियतों एवं हिंदी/राजस्थानी के साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ।
'मारवाड़ में उर्दू' पुस्तक की महता इस बात से स्पष्ट हो जाती है कि यह पुस्तक प्रत्येक उर्दू शोधार्थी और उर्दू के साहित्यकारों के साथ उर्दू अदब की जानकारी रखने/चाहने वालों के लिए आवश्यक सन्दर्भ रूप में अनिवार्य एवं संकलन योग्य पुस्तक है। और ऐसा इसलिए है क्योंकि इस पुस्तक से पूर्व उर्दू गद्य में मारवाड़ अंचल के उर्दू की इतनी पुख्तगी के साथ तहकीकात नहीं की गई थी।
इस पुस्तक में डॉ. ज़िया ने मारवाड़ में उर्दू के आरम्भिक बीज से लेकर वर्तमान तक का क्रमबद्ध रूप से इतिहास प्रस्तुत किया है। बीकानेर, नागौर, बाड़मेर, जोधपुर, पाली, सिरोही व जालोर आदि ज़िलों में उर्दू की शायरी, कहानी, नज़्म, तनकीद आदि पर गहन तहकीकात इस पुस्तक में हुई है।


आदरणीय विधायक गोपाल जोशी की अध्यक्षता में शुरू हुए इस कार्यक्रम का आगाज़ ठीक 12 बजे अब्दुल वाहिद अशरफी के स्वागत भाषण के साथ हुआ, जिसे आगे बढ़ाते हुए असद अली असद के संचालन में मेहमानों की गुलपोशी का दौर के बाद 'रस्मे-इजरा' (लोकार्पण) हुआ, जिसके बीकानेर के तमाम मीडियाकर्मी और शहर के अदबी लोग साक्षी रहे।
विमोचन के बाद पुस्तक पर चार पर्चे पढ़े गए, जो क्रमशः शायर जाकीर अदीब, सीमा भाटी, डॉ. सईद अहमद सिद्दीकी एवं शाहना ने पढ़े। जिसमें अदीब साहब ने ज़िया उर रहम्सन सिद्दीकी, अलीगढ़ का, सीमा भाटी ने प्रो. मोहम्मद नौमान खां, भोपाल की भूमिका, डॉ. अबुल फैज उस्मानी का पत्र सईद अहमद क़ादरी एवं डॉ. सादिक अली टोंक का लिखा पत्र युवा रचनाकार शाहनां ने पढ़ा।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विधायक गोपाल जोशी साहिब ने पुस्तक के कुछ अनछुए पहलुओं की ओर इशारा करते हुए डॉ. ज़िया की इस पुस्तक के काम की सराहना के साथ ही कहा कि ये पुस्तक शोधार्थियों के लिए डाइजेस्ट का काम करेगी।
मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध शायर अब्दुल मुग़नी 'रहबर' ने पुस्तक पर अपनी टिप्पणी में कहा कि ये पुस्तक आने वाली नस्लों के लिए विरासत है, जो हमेशा समृद्ध होती रहेगी। टोंक से पधारे उर्दू साहित्यकार एवं अंजुमन तरक्की ऐ उर्दू (हिन्द) शाखा राजस्थान ने अपने पत्र-वाचन में पुस्तक पर विस्तृत जायज़ा लिया, विभिन्न दृष्टान्त देते हुए किताब की पुख्तगी को पेश किया और कहा कि अब तक मारवाड़ में उर्दू गद्य पर कोई पुस्तक नहीं लिखी गई थी, डॉ. ज़िया ने पहली बार मारवाड़ के उर्दू गद्य पर किताब लिखी है, इसकी वजह से राजस्थान के उर्दू अदब का इतिहास मुकम्मल हो सकेगा।
किताब पर पाठकीय टिप्पणी करते हुए राजकीय डूंगर महाविधालय की प्रोफेसर असमा मसऊद ने कहा कि डॉ. ज़िया ने इस किताब के माध्यम में मारवाड़ में उर्दू के कई गुमनाम शायरों और लेखकों से परिचित करवाया है। ये कार्य ठीक उतना ही जटिल रहा है, जितना मरुस्थल के पाताल से पानी निकालना। इन्होंने अपनी मेहनत से मारवाड़ में मौजूद उर्दू के सरमाये को मंजरे आम पर लाने का अहम कार्य किया है।


पुस्तक के लेखक डॉ. जिया ने अपनी बात रखते हुए इस पुस्तक के लेखन से जुड़े तमाम पहलुओं और किस्सों पर चर्चा करते हुए इस पुस्तक के लेखन से जुड़ी कठिनाइयों का भी ज़िक्र किया तो उन सब का आभार भी व्यक्त किया, जिन्होंने इस काम को अंजाम तक पहुँचाने में सहयोग किया।
डॉ. ज़िया ने आपनी बात में कहा कि यहाँ 900 वर्ष पहले से ही उर्दू के निशान नज़र आने लगे थे। 1857 ई. की क्रांति के बाद मारवाड़ की रियासतों में उर्दू का तेजी से विकास होने लगा। उन्होंने शौकत उस्मानी साहिब की अदबी खिदमात का भी जिक्र किया, जो आज तक गुमनाम अँधेरे में ही रहे और मंज़रे-आम तक न हो पाये। इसी तरह 1927 ई. में सिरोही से प्रकाशित होने वाली उर्दू पत्रिकाओं की खोज कर उसे सामने लाने का कार्य भी हुआ है।
संचालन करते हुए शायर असद अली असद ने भी इस पुस्तक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और पूना के वरिष्ठ शाइर और आलोचक नज़ीर फतेहपुरी के भेजे सन्देश का भी वाचन किया तो नज़ीर साहब के शेर ने श्रोताओ से दाद भी हासिल की।


इस अवसर पर शब्द श्री संस्थान की तरफ से मोनिका गौड़, सीमा भाटी, मनीषा आर्य सोनी, रचना शेखावत, संजू श्रीमाली ने डॉ. ज़िया को सम्मानित भी किया।
आज तक न्यूज़ के चीफ स्टोरी डायरेक्टर यजत भारद्वाज ने गुलदस्ता भेंट कर डॉ. ज़िया का सम्मान किया।
कार्यक्रम के आख़िर में उर्दू शख्सियतों शमीम बीकानेरी, इरशाद अज़ीज़, जाकीर अदीब, अब्दुल मुग़नी रहबर, असद अली असद, असमा मसऊद आदि को डॉ. ज़िया ने अपनी पुस्तक भेंट की।
अंत में वरिष्ठ साहित्यकार इंजी. निर्मल वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सब मेहमानों को चाय-नाश्ते की दावत के साथ कार्यक्रम को विराम दिया।
इस अवसर बीकानेर की साहित्यिक शख्सियतों के साथ ग़ैर अदबी हज़रात और डॉ. ज़िया के घर के सदस्य भी उपस्थित रहे।
अब्दुल जब्बार बिकाणवी, राजाराम स्वर्णकार, अजीनुद्दीन सवाई माधोपुर, डॉ. जे डी बाहरठ, मुरली मनोहर माथुर, डॉ. अजय जोशी, नदीम अहमद, वली गौरी, अनुप गोस्वामी, डॉ. मन्जू कच्छावा, डॉ. अख़लाक़, शाहना, नेमचंद जी, अहमद सिद्दीकी, अशफाक क़ादरी, समी कादरी, नरपत सांखला, हरीश बी शर्मा, अकबर अली, प्रो नरसिंह बिनांनी, सुनील गज्जाणी, राजेन्द्र जोशी, डॉ. सुलक्षणा दत्ता, इसरार क़ादरी, रफीक बेजिगर, सोनू & पुन्नू एवं अन्य की सादर उपस्थिति रही।


- पुन्नू बीकानेरी

रचनाकार परिचय
पुन्नू बीकानेरी

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