प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मई 2015
अंक -33

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

स्पंदन के तत्वाधान में सफल काव्य-गोष्ठी का आयोजन
 
स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान, जयपुर द्वारा स्पंदन सभागार, लालकोठी स्कीम में 2 मई को दोपहर 3.30 बजे काव्य गोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डाॅ. कुसुम शर्मा मणिपाल यूनिवर्सिटी, विशिष्टि अतिथि डाॅ. वीरबाला भावसार थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. सुषमा सिंघवी ने की।
कार्यक्रम के आरम्भ में स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने मंचस्थ अतिथियों, सभागार में उपस्थित साहित्यकारों एवं मीडियाकर्मियों का स्वागत करते हुए कविता को मानव मन के उदगार व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम बताया।
काव्य गोष्ठी के आरम्भ में वरिष्ठ साहित्यकार स्व. अवधेश नारायण मुदगल जी को मौन श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
डाॅ. सीताशर्मा शीताभ ने सरस्वती  वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का सफल संचालन रूबी खान ने किया। जीवन के विविध पहलुओं को समेटती रचनाएँ कविता,  ग़ज़ल, गीत, हाइकु के माध्यम से सभागार को स्पंदित करती रहीं। कार्यक्रम में 30 से अधिक रचनाएँ सुनाई गईं। कुछ अंश दृष्टव्य हैं:-
 
डाॅ. कुसुम शर्मा-
आज जीवन जीत है पर जि़न्दगी की हार ना हो।
चार बातें इस तरह की, प्रेमधारा कम नहीं हो।
 
डाॅ. वीरबाला भावसार-
मानव, सृष्टि के प्राणी तुम हो।
दीन दुखी के संबल प्रकाश पुंज तुम हो।
 
डाॅ. सुषमा सिंघवी-
मैत्री की कोई शर्त न हो
 
नीलिमा टिक्कू-
(दोस्त)
जब-जब उसने मुझे आईना दिखाया, फासला हमारे दरमियाँ अौर भी उभर आया।
वो जब भी आता हाथ में अाईना लिये, मैं उसे बींधता जहर बुझे तीर लिए।
 
डाॅ. सीता शर्मा शीताभ-
(अमर)
ऐ मन! कुछ ऐसा कर गुजर कि मरने पे भी हो अमर।
निराश जीवन त्याग के कर बाधाओं से तू समर।
 
आभा सिंह-
मृत्यु नि:शब्द आना, ठंडे हाथों हिम कर जाना।
अो चिर निद्रे ऊर्जा के स्त्रोत समेटे, नवजीवन लेकर आना।
 
रूबी खान-
नारी नहीं निशक्त, ना वो अबला। है वो अब सशक्त।
 
रंजना त्रिखा-
शांत नींद सोने दो इसको, थक कर ये सोया है।
बना शहीद की माँ मुझको हर इक कलंक धोया है।
 
डाॅ. सरस्वती माथुर-
बाँसुरी हूँ मैं, अधर लगा कर, धुन निकालो।
 
डाॅ. संगीता सक्सेना
मैं धड़कन...
 
इसी के साथ माधुरी शास्त्री, राज चतुर्वेदी, रेणु चन्द्रा माथुर, डाॅ. अपर्णा चतुर्वेदी, मनोरमा शर्मा मनोरम, डाॅ. कृष्णा रावत, मनोरमा माथुर, सावित्री चौधरी, विनोद कुमारी किरण, डाॅ. आशा शर्मा, मंजुला गुप्ता, अनूप घई, ऊषा नागिया, कुसुम शर्मा सहित स्पंदन सदस्यों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को बाँधे रखा।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव उपाध्यक्ष माधुरी शास्त्री ने दिया।
 
 
सौजन्य-
नीलिमा टिक्कू
संस्थापक, अध्यक्ष
स्पंदन महिला सा. एवं शै. संस्थान
ई-311,312
लालकोठी स्कीम
जयपुर - 302015

- प्रीति अज्ञात
 
रचनाकार परिचय
प्रीति अज्ञात

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