प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
दिसम्बर 2016
अंक -52

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल-

उन अदाओं में तिश्नगी होगी
कोई खुशबू नई-नई होगी

यूँ ही नाराज़गी नहीं रखता
बात उसने भी कुछ कही होगी

होश आया कहाँ उसे अब तक
कुछ तबीयत मचल गई होगी

बेकरारी का बस यही आलम
बे-ख़बर नींद में चली होगी

वो बगावत की बात करता है
नज़्म मेरी कहीं पढ़ी होगी

फ़ितरते-आइना मुकम्मल है
हर हक़ीक़त बुरी लगी होगी

दाग़ चूनर का धुल नहीं सकता
होके मायूस चुप खड़ी होगी


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ग़ज़ल-

मेरे दर्दो-ग़म की कहानी न पूछो
मुहब्बत की कोई निशानी न पूछो

बहुत आरजूएं दफ़न मकबरे में
कयामत से  गुजरी  जवानी न पूछो ।।

मुझे  याद  है   वो   तरन्नुम   तुम्हारा ।
ग़ज़ल  महफ़िलों की पुरानी न पूछो ।।

हुई  रफ्ता   रफ्ता  जवां  सब अदाएं ।
सितम ढा गयी कब सयानी न पूछो ।।

बयां  हो  गई  इश्क की  हर हकीकत ।
समन्दर की  लहरों का पानी न पूछो ।।

सलामी  नजर से  नज़र  कर गयी थी ।
वो चिलमन  से नज़रें झुकानी न पूछो ।।

मुलाक़ात  ऐसी  न कुछ कह  सके हम ।
रही  बात  क्या  क्या  बतानी  न पूछो ।।


- नवीन मणि त्रिपाठी
 
रचनाकार परिचय
नवीन मणि त्रिपाठी

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ग़ज़ल-गाँव (1)