प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
दिसम्बर 2016
अंक -47

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल-वाटिका

बालगीत- सर्दी रानी

वापिस जाओ सर्दी रानी,
अब तुम अपने देश।

काँप रहे हैं सारे थर-थर,
देख आपका ओज।
जाने कौनसी शुभ घड़ी में,
हुई आग की खोज।
शीत नाम का जो इक पल में,
करती खत्म क्लेश।

चंचल पिन्टू की पीड़ा का,
कैसे करें बखान।
तुमने अपने रहते उसको,
करने न दिया स्नान।
उस नादां को फिर भी तुम पर,
आया नहीं आवेश।

शीत लहर और धुंध कोहरा,
बाँधो सब सामान।
अनाहूत तो इस जग में बोलो,
कब पाता है मान।
फिर मत आना दोबारा तुम,
सुनो मेरा आदेश।

कोट स्वेटर मफलर का अब,
सहन न होता भार।
सूरज से तो पता नहीं क्यों,
तुम जाती हो हार।
दुनिया बदली, तुम भी बदलो,
बदल गया परिवेश।।


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बालगीत- नटखट एक लंगूर

आज शहर से गाँव पधारा,
नटखट एक लंगूर।

लाठी ले दादा जी दौड़े,
मजा चखाऊँ ठहर निगोड़े।
रहा गुस्से से उनको घूर,
नटखट एक लंगूर।।

हरकत इसकी ऊटपटांग,
कैसी लम्बी भरे छलांग।
पल में जाय ये तो अति दूर,
नटखट एक लगूंर।।

कभी किसी के मटके फोड़े,
आम कहीं पर कच्चे तोड़े।
करता सब कुछ चकनाचूर,
नटखट एक लंगूर।।

देख उसे चिंटू घबराया,
मुझे बचाओ वह चिल्लाया।
बिलकुल डरता नहीं मगरूर,
नटखट एक लंगूर।।


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बालगीत- योग करें


तन-मन स्वस्थ रहे सभी का
आओ बच्चो योग करें!

पहला सुख है देह निरोगी
बात यही सब कहते योगी
वसुंधरा का भी तो जग में
वीर लोग ही भोग करें!

जो बच्चे सदा करते योग
उनके पास ना फटकें रोग
आलस्य अौर तनाव भी तो
पैदा तन में रोग करें!

खेलकूद है ज्ञान बढ़ाता
अनुशासन का सबक सिखाता
आओ हम सब खेलकूद से
तन अपना नीरोग करें!

घर शाला की करें सफाई
ठान आज ये मंडली आई
कटे फल और अशुद्ध नीर का
कभी ना हम प्रयोग करें!


- राजपाल सिंह गुलिया
 
रचनाकार परिचय
राजपाल सिंह गुलिया

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बाल-वाटिका (1)