प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2016
अंक -47

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कथा-कुसुम

कहानी- मैं भी इससे ब्याह करूँगी!


जाड़े की दोपहर हवा में गुनगुनाहट घोल रही है। मुस्कराकर खिली हुई धूप सबको ख़ुशियाँ बाँट रही है। छत पर एक माँ गुनगुनाते हुए अपने बच्चे की मालिश कर रही है। मालिश करने के बाद माँ बच्चे को कपड़े पहनाकर लिटा देती है। बच्चा मस्त होकर हाथ-पैर चलाने लगता है।
छत के एक कोने पर टी.वी. का ऐंटीना लगा है। उसके एक किनारे पर एक चिडि़या आकर बैठती है। ऐंटीना उस तरफ झुक जाता है। दूसरी तरफ उठ जाता है। दूसरी तरफ वैसी ही एक और चिडि़या आकर बैठती है। ऐंटीना सीधा हो जाता है। दोनों चिडि़याएँ बातें करने लगती हैं।

"बहुत दिनों के बाद मिले हम?"
"हाँ, सखी!"
"कैसी हो तुम?"
"मैं तो ठीक हूँ। तुम कैसी हो?"
"मैं भी ठीक हूँं।"

तभी उन्हें बच्चे की किलकारी सुनाई देती है- "कक्क्-कू ऽ... ऽ..."

"अरे! देखो, कितना सुंदर बच्चा है!", एक चिडि़या कहती है।
"यह तो हँस रहा है!", दूसरी चिडि़या कहती है।
"इसका टोपा कितना लंबा है!"
"स्वेटर कितना गुदगुदा है!"
"मोजे कितने चमक रहे हैं!"
"हाँ।"
"मैं तो इससे ब्याह करूँगी!"
"क्या?" दूसरी चिड़िया का मुँह खुला का खुला रह जाता है।
"मैं तो इससे ब्याह करूँगी!" पहली चिडि़या फिर कहती है।
"पागल हो गई है, क्या? चिडि़या कहीं ब्याह करती है!"
"मैं तो करूँगी!"
"तू जो इससे ब्याह करेगी, पिंजरे में बे-मौत मरेगी।"
"हाय! यह तो मैंने सोचा ही नहीं।"
"तो अब सोच ले।"
"पर ब्याह के बारे में भी तो सोच सकती हूँ?"
"तेरा तो दिमाग ख़राब हो गया है। तू सोच। मैं तो चली।"

दूसरी चिड़िया उड़ने लगती है। पहली चिडि़या भी उसके साथ उड़ने लगती है।
पहली चिड़िया फिर बच्चे की बातें शुरू कर देती है-

"बच्चा हमारे साथ उड़ता, तो कितना मज़ा आता?"
"ख़ूब मज़ा आता!"
"मैं उसके टोपे पर बैठ जाती!"
"मैं उसकी पीठ पर बैठ जाती!"
"मैं उसको गाना सुनाती!"
"मैं भी उसको गाना सुनाती!"

वे दोनों बच्चे के ऊपर उड़ने लगती हैं।
बच्चा उन्हें देखकर तेज़ी से हाथ-पैर चलाने लगता है।
ख़ुश होकर किलकारी भरता है- "कक्क्-कू ऽ... ऽ..."

"अरे! यह तो हमें बुला रहा है।"
"कुछ कह रहा है।"
"क्या कह रहा है?"
"मैं भी उडूँगा।"
"हाँ।"
"मैं तो इससे ब्याह करूँगी!" पहली चिडि़या गाने लगती है।
दूसरी चिडि़या भी गाने लगती है "मैं भी इससे ब्याह करूँगी!"


- रावेंद्रकुमार रवि
 
रचनाकार परिचय
रावेंद्रकुमार रवि

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कथा-कुसुम (1)