प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2016
अंक -45

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

बाल ग़ज़ल-

बताओ न पापा ये क्या हो गया है
कि बचपन कहाँ गुमशुदा हो गया है

पढ़ाई पढ़ाई पढ़ाई पढ़ाई
हरिक पल मेरा बोझ-सा हो गया है

न गिल्ली, न डंडा, न छुप्पम-छुपाई
बचा वक़्त स्क्रीन का हो गया है

कहाँ खेत-नदियाँ, कहाँ बाग़-झरने
सभी कुछ यहाँ ख़ाब-सा हो गया है

न ही माँ की लोरी, न कोई कहानी
मज़ा नींद का बे-मज़ा हो गया है

सुना है कि अनमोल होता था बचपन
ये सुनकर जिया अनमना हो गया है


- के. पी. अनमोल
 
रचनाकार परिचय
के. पी. अनमोल

पत्रिका में आपका योगदान . . .
हस्ताक्षर (1)ग़ज़ल-गाँव (1)गीत-गंगा (2)कथा-कुसुम (1)आलेख/विमर्श (2)छंद-संसार (1)ख़ास-मुलाक़ात (2)मूल्यांकन (17)ग़ज़ल पर बात (6)ख़बरनामा (17)संदेश-पत्र (1)रचना-समीक्षा (7)चिट्ठी-पत्री (1)पत्र-पत्रिकाएँ (1)