प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2016
अंक -50

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

नाटक

पेड़ बचेगा तभी बचेंगे

वन्य प्राणी व पर्यावरण सुरक्षा पर केन्द्रित नुक्कड़ नाटक

(नोट: इस नुक्कड़ नाटक में ढोलक या डफली का उपयोग होगा। इसलिए जरूरी है कि इन्हें बजा सकने वाले कलाकार ही अभिनय करें या फिर इन्हें बजा सकने वाले कलाकारों को अलग से शामिल रखा जाए।)


एक व्यक्ति (लड़का 1) कुल्हाड़ी से पेड़ (लड़का 6) काटने का अभिनय कर रहा है। पेड़ कटकर गिर पड़ता है। उस पर से एक चिड़िया (लड़की 1) भी नीचे आ गिरती है। हकबकाई-सी कुछ देर इधर-उधर भागती-दौड़ती है; अन्तत: गिरकर फड़फड़ाने लगती है।
दर्शकों के बीच से 4-5 लड़के-लड़कियों की एक मंडली गोलाकार दर्शक मंडल के भीतरी भाग में गाती हुई घूम रही है-


लड़का 2: हो…ऽ…एक चिरैया मारी-मारी…ऽ… एक चिरैया मारी-मारी…ऽ…मारी-मारी फिरती है
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : हो…ऽ…एक चिरैया मारी-मारी…ऽ… एक चिरैया मारी-मारी…ऽ…मारी-मारी फिरती है

इनके गाने के साथ ही लड़की 1 चिड़िया बनकर मारी-मारी फिरने की मुद्रा में दिखाई देती है।


लड़का 2 : हो…ऽ…एक चिरैया मारी-मारी…ऽ…मारी-मारी फिरती है
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : हो…ऽ…एक चिरैया मारी-मारी…ऽ…मारी-मारी फिरती है


लड़का 2 : हो…ऽ…छूट गया सब दाना-तिनका, भूखी-प्यासी गिरती है
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : हो…ऽ…छूट गया सब दाना-तिनका, भूखी-प्यासी गिरती है


लड़का 2 : इससे पूछे, उससे पूछे विनती करती फिरती है
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : इससे पूछे, उससे पूछे विनती करती फिरती है


लड़का 2 : कहाँ मेरा ठिकाना…ऽ… कहाँ मेरा ठिकाना…ऽ
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : कहाँ मेरा ठिकाना…ऽ…कहाँ मेरा ठिकाना…ऽ

गाना बीच में रोककर,मंडली में से ही…


लड़का 2 : हे…ऽ…री, बुधिया! तनि देख तो ऊ चिरैया काहे जमीन में पड़ी पंख फड़फड़ा रही है?
लड़की 2 : अभी देखती हूँ बापू।

जाकर, जमीन पर पड़े पेड़ और  फड़फड़ाती चिड़िया को निरखती-परखती है।


लड़की 2 : बापू! किसी जालिम ने वो पेड़ काट डाला है न, इसलिए अपने घोंसले समेत जमीन पर आ गिरी है… घायल हो गयी है बेचारी।
लड़का 2 : हे…ऽ…आग लगी है जंगल-जंगल, पेड़ कट रहे जंगल-जंगल, चौपाये सब भाग रहे।
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : हे…ऽ…आग लगी है जंगल-जंगल, पेड़ कट रहे जंगल-जंगल, सभी जानवर भाग रहे।

लड़का 2 : सभ्य कहाने वाले इन्सां उन पर गोली दाग रहे।
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : सभ्य कहाने वाले इन्सां उन पर गोली दाग रहे।

लड़का 2 :  बाघ, हिरन, खरगोश और भालू
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : हाथी, चिम्पैंजी झगड़ालू

लड़का 2 :  बाघ, हिरन, खरगोश और भालू, हाथी, चिम्पैंजी झगड़ालू
सभी कलाकार (उसका अनुसरण करते हुए) : अजगर जंगल त्याग रहे

लड़का 2 सहित सभी कलाकार : आग लगी है जंगल-जंगल, सभी जानवर भाग रहे।

इस दौरान कटा हुआ पेड़ बना लड़का जमीन पर गिरा रहता है, फड़फड़ाती चिड़िया बनी लड़की फड़फड़ाती-सी गोलाकार मजमे में चकराती रहती है। ये पंक्तियाँ गाते-गाते अन्य सभी कलाकार (लड़का 2, लड़की 2 के अतिरिक्त) चौपाया बनकर इधर-उधर भागने लगते हैं। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए कुछ कलाकारों को पहले से ही मंडली से अलग दर्शकों की भीड़ में शामिल करके रखा जा सकता है। एक लड़का अजगर अथवा मगरमच्छ बनकर सरकना शुरू कर देता है।

गाना बीच में रोककर …


लड़का 2 : हे…ऽ…री, बुधिया! तनि देख तो ई शोर कैसा है?
लड़की 2 : अभी देखती हूँ बापू।

भवों पर हथेली का छाता लगाकर दूर तक देखने का प्रयास करती है…


लड़की 2 :  जंगल में भगदड़ मची है बापू।
लड़का 2 : जंगल में भगदड़? बाहर निकलकर देख तो…बात क्या है?

लड़की घर से बाहर निकलने का अभिनय करती है। फिर दौड़कर वापस आती है।


लड़की 2 : हाय-हाय बापू, जंगल में तो किसी ने आग लगा रखी है।
लड़का 2 : आग लगा रखी है!!!  जंगल में कोई क्यों आग लगाएगा?
लड़की 2 : जंगल में लकड़ी चोरों के बड़े-बड़े गिरोह काम करते हैं बापू। वे लोग आस-पास की घास में आग लगाकर भाग जाते हैं। हवा का संग पाकर आग धीरे-धीरे सारे जंगल में फैल जाती है
लड़का 2 (अफसोस के साथ अपने माथे में हाथ मारते हुए) :  हे भगवान!
लड़की 2 : उस आग में जंगल में खड़े सैकड़ों-हजारों पेड़ तो झुलसते ही हैं बापू, उन पर रहने वाले पक्षी और गिलहरी वगैरह भी बेघर हो जाते हैं।
लड़का 2 : तो अभी-अभी जो एक चिड़िया जमीन पर गिरकर फड़फड़ा रही थी, वह इन लकड़ी चोरों की ही सताई हुई थी क्या?

इसी दौरान फड़फड़ाती चिड़िया का अभिनय करती लड़की 1 उनके नजदीक आ जाती है।


लड़की 1 : हो…ऽ…एक चिरैया मारी-मारी…ऽ… एक चिरैया मारी-मारी…ऽ…मारी-मारी फिरती है
               छूट गया सब दाना-तिनका, भूखी-प्यासी गिरती है…ऽ
               इससे पूछे, उससे पूछे विनती करती  फिरती है…ऽ
               कहाँ मेरा ठिकाना…ऽ… कहाँ मेरा ठिकाना…ऽ

लड़का 2 : कितनी दर्दीली आवाज में चिंचिया रही है बेचारी। मुझसे तो इस चिड़िया का दर्द देखा नहीं जा रहा बेटी।
लड़की 2 : हम लोग अगर लगातार पेड़ों को काटते रहे तो आने वाले बच्चों को चिड़ियाँ देखने को भी नसीब नहीं होगी बापू
लड़का 2  (एकाएक डरते हुए) : अरे, उधर देख बेटी…चीते और भेड़िए गाँव की तरफ भागे चले आ रहे हैं।
लड़की 2 : उनके रहने की जगहों को मनुष्य आग के हवाले कर देगा…पेड़ों को काट डालेगा… कारखानों का तेजाब मिला पानी नदियों और तालाबों में बहाकर उन्हें जहरीला बना डालेगा…तो क्या होगा बापू?
लड़का 2 : मछलियाँ…मेंढ़क…चूहे…नेवले…छिपकली जैसे कितने ही जीव तो इस तरह जड़ से ही खत्म हो जायेंगे बेटी
लड़की 2 : जी बापू…और जो चीते, भेड़िए, भालू भागकर इन्सानी बस्तियों में आएँगे तो वे भी ‘आदमखोर’ बताकर मार डाले जाएँगे…है न।
लड़का 2 : सो तो है।

इसी दौरान चीता और हिरन बने दो लड़के इनके निकट आ रुकते हैं


लड़का 3 : अरे ओ सभ्य कहलाने वाले इन्सानो! सुन लो…इस बाघ का एक दिन सिर्फ नाम ही नाम रह जाएगा या सिर्फ तस्वीरें…तरस जाओगे मेरा दीदार करने को…पहले हमारे रहने के ठिकानों पर आग लगाकर हमें बेघर करते हो और हम जब पनाह की उम्मीद में तुम्हारी ओर कदम बढ़ाते हैं तो नरभक्षी कहकर हमें मार डालते हो…धिक्कार है, धिक्कार है तुम्हारे सभ्य होने पर

लड़का 4 : मुझे भी पहचान तो रहे ही होगे। हिरन हूँ मैं हिरन। अमन पसंद हम जंगली जीवों को मारने के तुम लोगों ने हजार बहाने तय कर रखे हैं। किसी को हमारी खाल चाहिए, किसी को हड्डियाँ, किसी को सींग चाहिए, किसी को दाँत…किसी को हमारा मांस स्वादिष्ट और ताकतवर लगता है तो किसी को कुछ और

इसी दौरान अन्य जानवर भी वहाँ आ रुकते हैं। हाथी का अभिनय करने वाला लड़का आगे आकर बोलता है-


लड़का 5 : किसी का दाँत इन्हें अच्छा लगने लगता है, किसी का नाखून…पुराने जमाने से चला आ रहा है तरह-तरह के बहाने बनाकर वन के जीवों की हत्या करने का यह सिलसिला…कान खोलकर सुन लो—धरती के बचने से ही मनुष्य बचा रह सकेगा …और मनुष्य को बचाने के लिए धरती के पर्यावरण का बचना जरूरी है
लड़की 1 : याद रखो ए इन्सानो! तुम्हारे हाथों एक तितली का मरना भी आसपास के पर्यावरण को असन्तुलित करता है…हवाई पट्टियों के ऊपर वाले आसमान में गैसें छोड़कर तुमने गिद्ध, चील और कौए खत्म कर डाले…हम जैसी नन्हीं चिड़ियों के घोंसले रखने को जमीन पर पेड़ नहीं छोड़े…बन्दरों को दर-ब-दर घूमने पर मजबूर कर दिया…अपने आप को…मनुष्य जाति को और इस धरती को सुरक्षित रखना चाहते हो तो सुन लो—चिड़िया से घोंसला बनाने की जगह मत छीनो…मछली से उसके तैरने का पानी मत छीनो, मोर से उसके नाचने का जंगल मत छीनो, तितलियों से उनके मँडराने का उपवन मत छीनो, हिरनों से कुलाँचें भरने का मैदान मत छीनो, कोयल से उसके कुहुकने की और शेर के उसके दहाड़ने की जगह मत छीनो। प्रकृति ने विचरने को जिसे जो जगह दी है, आजादी के साथ उसे वहीं विचरने दो

सभी जानवर और चिड़िया मिलकर, कटे पेड़ के रूप में जमीन पर पड़े लड़का-6 को उठाकर खड़ा करते हैं।

सभी एक साथ : पेड़ बचेंगे तो जीव बचेंगे, जीव बचेंगे तो पर्यावरण बचेगा, पर्यावरण बचेगा तो बचेगी यह धरती और तभी बचे रह सकते हो तुम सब…धरती पर अपना हक जताने वाले अभिमानी इन्सानो!


(गाते हुए)

हे…ऽ…आग लगी है जंगल-जंगल,
पेड़ कट रहे जंगल-जंगल,
सभी जानवर भाग रहे।
सभ्य कहाने वाले इन्सां
उन पर गोली दाग रहे।

हे…ऽ…बाघ, हिरन, खरगोश और भालू,
हाथी, चिम्पैंजी झगड़ालू
अजगर जंगल त्याग रहे
आग लगी है जंगल-जंगल,
सभी जानवर भाग रहे।


- बलराम अग्रवाल
 
रचनाकार परिचय
बलराम अग्रवाल

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