नवम्बर 2016
अंक - 20 | कुल अंक - 53
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

उभरते-स्वर

कविता- तारे

चमकते हैं आसमान में तारे
छोटे-छोटे प्यारे-प्यारे

बच्चों को लगते बड़े ही प्यारे
नादान बच्चे कहते यह हीरे हमारे

तो कुछ बोलते हैं
बड़े अच्छे हैं इनके नजारे

हमने देखा टूटता तारा
बड़ा सुंदर था वह नजारा

चमचम वह करता जाए
ध्रुव तारा आसमान की शोभा बढ़ाए

जब छिप जाता बादलों में चांद
आसमान हो जाता सुनसान

टिम-टिम करते तारों आ जाओ!
आसमान में अपनी चादर बिछाओ


- सृष्टि

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सृष्टि

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उभरते स्वर (1)