प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2016
अंक -50

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

कविता- पतंग की सैर

बाँध गले में लंबी डोर
मैं चली आकाश की ओर

फर-फर फर-फर ऊपर जाती
सर-सर सर-सर नीचे आती

कभी ठुमक-ठुमक इतराती
कभी सहेलियों से लड़ जाती

कभी किसी को काट गिराती
कभी कट खुद नीचे आ जाती।


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कविता- रिमझिम बरसात में

बादलों के गोले
उड़ चले आकाश में,
टप-टपकर बूँदें गिरीं
रिमझिम बरसात में।

झरने दौड़े सारे मिलकर
बहने को साथ में।
नहा गए पेड़-पर्वत
रिमझिम बरसात में।

घर से दौड़े बच्चे सारे,
नाव लिए हाथ में।
खुद भी दौड़े नहाने को
रिमझिम बरसात में।

छम-छम उतरने लगीं,
पकौड़ियाँ कढ़ाई में।
गप-गप कर खाने लगे हम,
रिमझिम बरसात में।।


- अनुपमा तिवारी
 
रचनाकार परिचय
अनुपमा तिवारी

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कविता-कानन (1)