नवम्बर 2016
अंक - 20 | कुल अंक - 53
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

कविता- घोंसला

तिनका-तिनका लाकर चिड़िया
बना रही शाखों पर घर,
कल इसमें चहकेगा जीवन
तब होगा सबकुछ सुन्दर।

चिड़िया देख रही है सपना
आशाओं से आंखें भर,
भूख, प्यास वह भूल गई है
श्रम करती तन्मय होकर।

एक घोंसले को बनने में
लग जाते हैं कई पहर,
हॅंसी, खेल में तोड़ इसे हम
चिड़िया पर न ढाएॅं कहर।

रहे ध्यान हमसे चिड़िया की
खुशी न जाए कहीं बिखर,
सोचें कितनी मुश्किल होगी
अगर कहीं हम हों बेघर।।


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कविता- बच्चे

हम बच्चों से प्यार करें
फिर उनमें संस्कार भरें,
इतना संबल दें उनको
नहीं किसी से कभी डरें।

सदा प्रेम से समझाएँ
अच्छी बातें बतलाएँ,
झूठ नहीं बोलें उनसे
हिल-मिल रहना सिखलाएँ।

घृणा-द्वेष में नहीं पलें
रूखेपन में नहीं ढलें,
उनके भोले बचपन को
हम कटुता से नहीं छलें।

बच्चे फूलों-से महकें
पंछी-से खुश हो चहकें,
पाएॅं सबसे अपनापन
भेदभाव में ना बहकें।

बच्चे हैं कोमल डाली
यहाँ वहाँ मुड़ने वाली,
सही दिशा में बढ़ें सदा
बस करनी यह रखवाली।।


- सुरेश चंद्र सर्वहारा

रचनाकार परिचय
सुरेश चंद्र सर्वहारा

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