प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2016
अंक -50

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

कविता- मैनपाट की सैर कराऊं

आओ प्यारे बच्चो!
छत्तीसगढ़ का यह सरगुजा
घाटी समतल वाला,
क़ुदरत के हैं कई अजूबे
हरा-भरा है सारा।

मेहनतकश हम लोग सभी हैं,
मन के सीधे-सादे।
प्रण अपने के सच्चे पक्के
ऊंचे बड़े इरादे,
नहीं किसी को छलते हम हैं
नहीं धौंस से दादे।

अंबिकापुर में आओ जब भी
मैनपाट सब घूमो,
अज़ब-ग़ज़ब की दुनिया सारी
मिलकर सारे झूमो,
ऊंचे--ऊंचे टीले चढ़कर
भले गगन को चूमो।

टाइगर मछली स्थल यहाँ हैं
मन हर्षाने वाले,
इधर-उधर हैं दौड़े रहते
बदरा घोड़े काले,
बौद्ध मठों की छटा निराली
कुछ नद झरने नाले।

धरती बनी खिलौना कैसे
यह आकर भी देखो,
जलजली में नाचो-कूदो
सब सुख पाकर देखो,
बूढ़े बच्चे भी बन जाते
वह फल खाकर देखो।।


- डॉ. प्रत्यूष गुलेरी
 
रचनाकार परिचय
डॉ. प्रत्यूष गुलेरी

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