प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अक्टूबर 2016
अंक -42

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा
प्रीति अज्ञात के बहुप्रतीक्षित काव्य-संग्रह 'मध्यांतर' का लोकार्पण
 
 
 
"प्रीति की कविताओं को पढ़ना एक संपूर्ण जीवन को जीते हुए देखने जैसा है। इनकी रचनाओं का सर्वाधिक सुखद पक्ष इनका मानवीय सरोकार से जुड़ा होना है। ये व्यक्तिगत न होकर समाज में परिवर्तन का आह्वान करती हैं, इन्हें पढ़ते हुए मन चिंतन को विवश हो उठता है और एक सकारात्मक समाज में जीने की उम्मीद कर बैठता है। इनमें बदलते सामाजिक मूल्यों और परिस्थितियों के प्रति आक्रोश भी है, लेकिन ये हताश होकर हारने की बजाय उससे जूझना अधिक सार्थक समझती हैं। यही एक कवि का कर्त्तव्य भी है और उद्देश्य भी" - लक्ष्मी शंकर बाजपेई
 

17 सितंबर 2016, हिंदी भवन (नई दिल्ली) में चर्चित कवयित्री एवं लेखिका प्रीति 'अज्ञात' की पुस्तक 'मध्यांतर' का विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेई, श्री आलोक श्रीवास्तव एवं प्रख्यात कवयित्री अनामिका जी ने मुख्य अतिथि के रूप में मंच की शोभा बढ़ाई। इस कार्यक्रम में संपादक द्वय श्री मुकेश सिन्हा एवं अंजू चौधरी अनु जी की संपादन श्रृंखला की अगली कड़ी के रूप में 'सौ क़दम' पुस्तक का सफल विमोचन भी हुआ। वहां उपस्थित कविगणों ने काव्यपाठ भी किया।
साहित्य जगत से जुड़े प्रबुद्ध चेहरे, फेसबुक की दुनिया के कई रचनाकार, मित्रगण और प्रीति जी के परिवार के सदस्यों की उपस्थिति ने इस लोकार्पण को एक अनूठे ही रंग में रंग दिया।
 
 
प्रीति 'अज्ञात' लोकप्रिय साहित्यिक वेब पत्रिका 'हस्ताक्षर' की संस्थापक व संपादक हैं। पिछले तेरह वर्षों से इनकी पहचान एक लेखिका, ब्लॉगर  के साथ-साथ, सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी है। आप 9 साझा-संग्रहों में सम्मिलित हुई हैं तथा इन्होंने 4 पुस्तकों का सफल संपादन भी किया है। आप स्कूली दिनों से ही लेखन में रूचि लेती रहीं हैं और बीते कुछ वर्षों से अपने ब्लॉग्स पर भी खासी सक्रिय हैं। अब तक कई पुरस्कार/सम्मान प्राप्त कर चुकी प्रीति जी, 2015 में देश के दो सर्वश्रेष्ठ हिंदी ब्लॉगरों में एक चुनी जा चुकी हैं। इसके लिए इन्हें थाईलैंड में सम्मानित भी किया गया था।
 
'मध्यांतर' प्रीति 'अज्ञात' का प्रथम एकल काव्य-संग्रह है। इसमें उन्होंने जीवन से जुड़े सभी पहलुओं को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ स्पर्श किया है। यह पुस्तक अमेज़न और इन्फीबीम पर उपलब्ध है।
संपर्क - [email protected]

 


- आज़र ख़ान