प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
सितम्बर 2016
अंक -39

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल-वाटिका

बिल्ली माैसी

बिल्ली मौसी आती है,
हमको आँख दिखाती है।
पहले बहुत डराती है,
जब मारूँ भग जाती है।
चूहे की आहट पाते ही,
धीरे से छिप जाती है।
चूहा जैसे बाहर आये,
उस पर कूद लगाती है।
उसको बहुत सताती है,
पर मेरे मन को भाती है।।




गाय हमारी माता

गाय हमारी माता है,
दूध का उससे नाता है।
ख़ुद तो भूसा घास है खाती,
हमको मीठा दूध पिलाती।
बछड़ा उनका हमको भाता,
इधर उधर है खूब दौड़ाता।
लाल श्वेत और काली है,
दो-दो सींगों वाली है।
हम तो उससे कभी न डरते,
मिलकर उसकी पूजा करते।।




बहादुर मच्छर

सूरज जब छिप जाता है,
एक बहादुर आता है।
पहले गाना गाता है,
फिर सुई चुभाता है।
मेरी इससे कभी न पटती,
यह तो है बस चालू कपटी।
डेंगू मलेरिया से इसकी यारी,
लेकर आये नई बीमारी।
हर तरफ सफाई लाएंगे,
मच्छर को दूर हो भगाएंगे।।


- दुर्गेश्वर राय वीपू
 
रचनाकार परिचय
दुर्गेश्वर राय वीपू

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बाल-वाटिका (4)