जुलाई 2016
अंक - 16 | कुल अंक - 53
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

कविता-कानन

जब एक स्त्री नदी से मिलती है


वह जितनी आसानी से कह सकती थी दुख

मैं नहीं कह सकता था (यद्यपि जानता था)
उसने कहा
नहीं, कहा नहीं
उसने अपनी आंखें झपकायीं (जिनमें नमी थी)
नहीं, आंखों का कुछ नहीं
बस वह उठकर खड़ी हो गयी
जहाँ मुश्किल से थी उसके खड़े होने की जगह
और नीचे एक सनातन दुख था
स्त्री की छवि की तरह फैला हुआ
मैं उसे छूना चाहता था
पर वह बोल रही थी
मैंने कहा लड़की तुम अब उड़ सकती हो!
वह चिड़िया की तरह उड़ती हुई
एक नदी की तलाश में है
नीम अंधेरे वह अपना अतीत धोती है नदी में
जब एक स्त्री नदी से मिलती है
तो चमकता है सुबह का चेहरा!
 
***************************
 
मेरे पास नहीं हैं उतनी कविताएँ

मेरे पास नहीं हैं उतनी कविताएँ
जितने धरती पर अनदेखे अनजाने फूल हैं
आकाश में न गिने गये तारे हैं
और हैं जीवन में अनगिन दुख!
लौट आता हूँ रोज मैं अपनी भाषा में
तलाशते हुए तुम्हें ऐ मेरी खोई हुई आत्मा
निहारता हूँ परिधान बदलते सच को
निरखता हूँ कैसा है उसका अनिर्वचनीय रूप!
उत्सव करते हैं सूखे फूल और जीर्ण पात
हर बार कहने से रह जाती है भीगे मन की बात
हमने हथेलियों पर बर्फ को पिघलते देखा है
फिर कौन सदियों की जमी बर्फ के पार से पुकारता है
कि मैं सुनता हूँ उसको
उस तक मेरी आवाज नहीं पहुंचती!
इन अनगिन अनजानी आकाशगंगाओं में
कोई सृष्टि हमारे स्पर्श की प्रतीक्षा में है
और हमारी इस दुनिया में कोई सच
अभिव्यक्त होने की बेचैनी से भरा है।
हर पल खिलता कोई फूल
हर दिन जनमता कोई बच्चा
यही कहता है
हर मौसम-बेमौसम में रंग की तरह खिलो
और भाषाहीन इस दुनिया में नि:शब्द न मिलो!
 
*************************************
 
कविता का चेहरा

आपका सौन्दर्य बोध
आपकी समाजशास्त्रीय समझ से जुड़ा होता है
कवियों से यह कहने की इच्छा होती है
पर संभव है वे बुरा मान जायें!
कविता की मुश्किल है
कि स्त्रियाँ भक्तिकाल में टहल रही हैं
और रीतिकाल में डूबे हैं पुरुष
और कविता को वहाँ से बाहर लाने की जिम्मेदारी
कुछ छायावादी आलोचकों की है
जो जब भी 'अद्भुत' कहते हैं
कुछ जादू करते हैं!
कवि की आत्मा में कांच होता है
जो जितना साफ होता है
उतना साफ दिखता है कविता का चेहरा
कवियों! आपकी आत्मा का कांच कहाँ है?

- राकेश रोहित

रचनाकार परिचय
राकेश रोहित

पत्रिका में आपका योगदान . . .
कविता-कानन (1)