जून 2016
अंक - 15 | कुल अंक - 54
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

उभरते स्वर

इन्द्रधनुष

बारिश के बाद जब
खुले आसमान में एक
बड़ा-सा इन्द्रधनुष
देता है दिखाई
सात रंगों से सजा!
मन को
आनन्दित करने वाला,
हर रंग को परिभाषित करता
कभी प्रेम के रंगों से,
कभी शांति के रंगों से
पर, मुझे तो
इन्द्रधनुष के सभी रंग पसंद है
जानते हो क्यों?????
 
क्योकि हर रंग मुझे
तुम्हारे प्रेम के रंगों में
डूबा हुआ दिखाई देता है
और
ये सप्तरंग
मेरे जीवन में
बहुत मायने रखते है
ठीक वैसे ही
जैसे तुम बहुत खास हो मेरे लिए
इन्द्रधनुष के रंगों की तरह
 
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उड़ान
 
उड़ने दो खुले आसमान में
उन परिंदों को
क्यों पिंजरे में कैद कर रखा है
उड़ान भरने दो उन्हें
लम्बी दूरी की
 
उन्हें सोने का पिंजरा नहीं
खुला आसमान चाहिए
उन्हें सोने का कौर नहीं
प्रकृति से भोजन चाहिए
उन्हें बंदिशों का प्रेम नहीं
उन्हें उनमुक्त प्रेम चाहिए
 
उड़ने दो उन परिंदों को
जो तरस रहे हैं
खुले आसमान में
अपनी उड़ान भरने को
वहाँ तक
जहाँ तक
क्षितिज उनकी प्रतीक्षा कर रहा है

- सपना परिहार

रचनाकार परिचय
सपना परिहार

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