प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जून 2016
अंक -45

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

अच्छा भी होता है

जल संरक्षण

 

जहाँ जीवन की विषमताओं, समाज की कुरीतियों, व्यर्थ के दंगे-फ़साद, न्याय-अन्याय की लड़ाई, अपने-पराए, रिश्ते-नाते, ईर्ष्या, अहंकार और ऐसी ही तमाम विसंगतियों में उलझकर जीना दुरूह होता जा रहा है वहीं कुछ ऐसे पल, ऐसे लोग अचानक से आकर आपका दामन थाम लेते हैं कि आप अपनी सारी नकारात्मकता त्याग पुन: आशावादी सोच की ओर उन्मुख हो उठते हैं. बस, इसी सोच को सलामी देने के लिए हमारे इस स्तंभ 'अच्छा' भी होता है!, की परिकल्पना की गई है, इसमें आप अपने या अपने आसपास घटित ऐसी घटनाओं को शब्दों में पिरोकर हमारे पाठकों की इस सोच को क़ायम रखने में सहायता कर सकते हैं कि दुनिया में लाख बुराइयाँ सही, पर यहाँ 'अच्छा' भी होता है! - संपादक

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स्वच्छ जल बहुत तरीकों से भारत और पूरे विश्व् के नागरिकों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। साथ ही इसका अभाव एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इस समस्या को अकेले या कुछ समूह ही मिलकर नहीं सुलझा सकते हैं, इसके समाधान के लिए वैश्विक स्तर पर लोगों के सम्मिलित प्रयास की जरूरत है।

भविष्य मे जल की कमी की समस्या को सुलझाने के लिए 'जल संरक्षण' ही जल बचाना है। भारत और दुनिया के दूसरे देशों मे जल की भारी कमी है जिसकी वजह से आम लोगों को पीने और खाना बनाने के साथ ही रोजमर्रा के कार्यो को पूरा करने के लिए जरुरी पानी के लिए लम्बी दुरी तय करनी पड़ती है। जबकि दूसरी ओर पर्याप्त जल के क्षेत्रों में लोग अपनी दैनिक जरूरतों से ज्यादा पानी  बर्बाद कर रहे हैं। हम सभी को जल के महत्व और भविष्य मे जल की कमी से संबंधित समस्याओं की समझने की जरूरत है। हमें अपने जीवन में उपयोगी जल को बर्बाद और प्रदूषित नहीं करना चाहिए।

 
धरती पर सुरक्षित और पीने के पानी के बहुत कम प्रतिशत के आकलन के बाद जल संरक्षण या जल बचाव अभियान हम सभी के लिए जरुरी हो गया है। इसी पवित्र उद्देश्य के साथ 'नयी दुनिया प्रेस' का मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में ग्यारह सौ जलाशय के संरक्षण का महाअभियान 8 मई 2016 को एक साथ चालू किया गया ।
प्रथम चरण में सरगुजा संभाग मुख्यालय अम्बिकापुर से लगे ग्राम करजी के रास ढोडी की श्रमदान से साफ़-सफाई की गयी। यह ढोडी लोगों की आस्था से जुड़ी हुई थी और बरसों से बंद थी लेकिन श्रमदान से पानी पीने लायक निकलने लगा और उसके साथ ही उसके रखरखाव के लिए जरुरी कार्य किये गए हैं जिससे कि भविष्य मे यह ढोडी बंद न हो।
कार्यक्रम के अगले चरण में अम्बिकापुर के वार्ड 23 शहीद वीर नारायण के झूरी तालाब को श्रमदान से साफ़ सफाई कर संरक्षित करने का प्रयास किया गया।
 
दोनों चरणों के कार्यक्रम में स्थानीय निवासियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और शहर के गणमान्य नागरिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम के दौरान सांसद सरगुजा के दवारा 5 लाख रुपए तालाब के रखरखाव के लिए दिए गए।इस अवसर पर महापौर ने सभी पार्षदोंं से आग्रह किया कि अपनी निधि से 1 -1 लाख रुपए जल संरक्षण के लिए दें। पार्षदोंं ने अपनी सहमति देते हुए 56 लाख रुपए इस नेक कार्य के लिए दिए।
 
भारत के जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, पानी की कमी और इससे जुड़ी सभी समस्याओं के बारे मे हमें अपने आप को जागरूक रखना चाहिए और जल संरक्षण के लिए एक साथ आगे आना चाहिए। निजी जीवन में जल संरक्षण के लिए हमें अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत नहीं है हमें केवल अपने प्रतिदिन की गतिविधियों मे कुछ सकारात्मक बदलाव करने की जरूरत है।
सही कहा गया है कि सभी लोगों का छोटा प्रयास एक बड़ा परिणाम दे सकता है।
 
 

 


- सय्यद अख्तर हुसैन
 
रचनाकार परिचय
सय्यद अख्तर हुसैन

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