प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मई 2016
अंक -42

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

'परवाज़' साझा ग़ज़ल संग्रह का विमोचन
 

 



'काव्यांजलि- सृजन की उड़ान' साहित्यिक समूह के प्रथम साझा ग़ज़ल संग्रह 'परवाज़' का विमोचन समारोह और साहित्यकार सम्मान समारोह 01 मई 2016 रविवार को शाम 5 बजे दीनदयाल मार्ग स्थित जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय युवा केंद्र, दिल्ली के एन. डी. तिवारी हॉल में आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम और समारोह की अध्यक्षता डॉ. कुँवर 'बेचैन' ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में श्री अशोक वर्मा उपस्थित रहे। अन्य विशिष्ट अतिथियों में पंजाब से पधारे डॉ. अरविंद पराशर और उदयपुर से पधारे श्री उपेन्द्र 'अणु' भी सम्मिलित रहे।
 

'परवाज़' नामक नव्य प्रकाशित कृति काव्यांजलि परिवार के अठारह ग़ज़लकारों की मौलिक ग़ज़लों का संग्रह है, जिसका सम्पादन कोटा, राजस्थान के प्रसिद्ध कवि नवीन गौतम 'निश्छल' ने किया है। सम्मिलित ग़ज़लकारों में समोद सिंह 'चरौरा', सुनंदा झा 'सीप', सत्येंद्र सिंह, सुरेश अग्रवाल 'अधीर', श्रीमति रेनुजा, मानक शाह, राहुल वर्मा 'अश्क़', कुमारी स्मृति, सुशील तिवारी, जितेंद्र सिंह 'नील', गुँजन गर्ग 'गूँज', विनोद गंगावासी, आशारानी जैन 'आशु', अरुण गर्ग, स्वदेश सिंह 'चरौरा' , राजा खान 'साहिल' और प्रह्लाद सोनी 'सागर' उपस्थित रहे।

इस समारोह में काव्यांजलि परिवार ने साहित्यकार डॉ. कुँवर 'बेचैन' एवं श्री अशोक वर्मा को वर्ष 2016 के 'काव्य रत्न' सम्मान से अलंकृत किया। तदुपरांत डॉ. अरविंद पराशर और श्री उपेन्द्र 'अणु'  को 'काव्य गौरव सम्मान-2016' से अलंकृत किया गया। समस्त प्रतिभागी अठारह ग़ज़लकारों को 'गज़ल साधक सम्मान-2016' से सम्मानित किया गया।

इस समारोह में काव्य संध्या के अंतर्गत कृष्णकांत 'मधुर', भूपेंद्र 'भरतपुरी', पी.के. 'आजाद' और काव्यांजलि परिवार के काव्याध्यक्ष एवं 'परवाज़ ' के संपादक नवीन गौतम सहित अन्य कवियों ने अपनी रसपूर्ण रचनाओं का सस्वर वाचन किया। 'परवाज़' में 18 ग़ज़लकारों की लगभग 180 ग़ज़लें सम्मिलित की गई हैं जो राष्ट्र प्रेम, बेटी बचाओ, नारी शिक्षा, सामाजिक चुनौतियों के विरुद्ध आवाज़, भ्रातृत्व, आज के बदलते हालात जैसे अनगिन विषयों पर आधारित हैं।
काव्यांजलि परिवार छन्दबद्ध काव्य रचनाओं का पक्षधर कवि समुदाय है और काव्य के अन्य रूपों में भी काव्य रचनाओं द्वारा साहित्य सेवा में तल्लीन है।


- आज़र ख़ान