प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अप्रैल 2015
अंक -39

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

हायकु
1
वीर हँसते
जिन्दगी ज्यूँ छेड़ती
भीरु रो लेते ।
2
वसंत शोर
रवि-स्वर्णाभा-होड़
पीले गुच्छों से।
3
असार स्वप्न
भस्म हुई उम्मीदें 
धुँआ जिन्दगी ।
4
दुःख व हंसी
जिंदगी की सौगातें
रूप सिक्के के ।
5
पद के मद
आंगन में दीवारें
घर कलह।
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1
माला की सूता
संजोये दो-दो ड्योढीं
सेतु है सुता ।
2
बिहँसे हिय
छूती शिखर सुता
नैन में भय।
3
चक्की जोहती
खनकती चूड़ियाँ
दाल दरती ।
4
डूबाती ठाँव
देहली जाती लाँघ
मिटाती छाँव।
5
जीव सींचती
स्थितप्रज्ञ स्त्री धारा
अंक भींचती ।
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1
जीते जी .... जीते
पर्स ... हर्ष .... संघर्ष
...... नारी के हिस्से।
2
आस बुनती
संस्कार सहेजती
सर्वानंदी स्त्री।
सर्वानन्द = जिसको सभी विषयों में आनंद हो
3
स्त्री की त्रासदी
स्नेह की आलिंजर
प्रीत की प्यासी।
आलिंजर =  मिटटी का चौड़े मुंह का बर्तन = बड़ा घड़ा
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1
स्त्री विरुद्ध स्त्री
रूढ़ि सन्नद्ध स्थिति
जटिल मसला ।
2
स्त्री विरुद्ध स्त्री
पुरुष तरफदारी
खोटा समझ ।
3
स्त्री विरुद्ध स्त्री
दमन अनिवार्य
सतही सोच ।
4
स्त्री विरुद्ध स्त्री
सनातनी व्यवस्था
वैर निभाना ।
5
स्त्री विरुद्ध स्त्री
सत्ता परिवर्तन
टूटा सपना ।
 
 

 


- विभा रानी श्रीवास्तव
 
रचनाकार परिचय
विभा रानी श्रीवास्तव

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