प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मार्च 2016
अंक -42

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल की बात
ग़ज़ल की बात (किश्त 2)
 
 
साथियों, नमस्कार!
पिछले अंक में हमने ग़ज़ल के रूप का सामान्य परिचय पाया। आप सभी के पर्याप्त स्नेह और भरपूर आशीर्वाद की परिणिति के रूप में दूसरी किश्त सादर प्रस्तुत है। पहले अंक में हमने सतत लहरों (सालिम बहरों) की सात मूल हिलोर को याद रखने के लिए एक मिसरा पाया था-
तराना\ झूमकर\ मुहब्बत का\ गुनगुनाओ\ हँसते रहो\ उदास कभी\ न रहो सनम
122  \  212  \  1222  \  2122  \  2212  \  12112  \  11212
 
इन सात मूल हिलोर में प्रथम पाँच में केवल एक छोटी बूँद (मात्रा) है, शेष बड़ी बूँदें (मात्राएँ) हैं।
उदाहरण-
1) तराना= 122 = इरादा, गजानन, मुहब्बत, फिसलना, मचलकर, हवाएँ, खिलौना
2) झूमकर= 212 = साथियों, कशमकश, यातना, दिलनशीं, सुरमई, ख़ासकर, आजकल
3) मुहब्बत का= 122 2 = समझदारी, वफ़ादारी, निहारूंगा, पुकारोगे, बदल जाना
4) गुनगुनाओ= 212 2= आज़माना, रहनुमाई,चाँदतारों, रातरानी, मुसकुराकर, आदमीयत
5) हँसते रहो= 22 12 = आवारगी, पाकीज़गी, बादे सबा, पर्दानशीं, मायूसकुन
 
इन सभी हिलोर में छोटी बूँद (यानि लाम =1) की स्थिति भर बदली है। अगर इन हिलोर में छोटी और बड़ी बूँदों को अलग अलग करके लिखें तो तीन तरह के हर्फ़ मिलते हैं-
तराना =  त  रा  ना =  1  2  2
गजानन=  ग  जा  नन =  1  2  2
समझदारी=  स  मझ  दा  री =  1  2  2  2
मुसकुराकर=  मुस  कु  रा  कर =  2  1  2  2
 
1) वे हर्फ़ जो विशुद्ध बड़ी बूंद हैं यानि दीर्घ स्वर (आ , ई , ऊ , ओ , औ , ए , ऐ , अं , अः) युक्त हैं। इन्हें हर्फ़े इल्लत (दीर्घ स्वर ) भी कहते हैं।
(अलिफ़ = आ >>> याय= ई, ए , ऐ >>> वाव = ऊ , ओ , औ)
 
इस तरह के विशुद्ध गुरु को सकील यानि भारी (heavy) कहते हैं। इन सकील गाफ़ (भारी गुरु) को ऊपर के उदाहरणों में देखें- रा , ना , री , दा  आदि। कोड (code )= 2
2) वे हर्फ़ जो छोटी मात्रा युक्त हैं लेकिन एक साथ उच्चारित हो रहे हैं, इन्हें मिलाकर एक ही शिरोरेखा (upper line) के नीचे लिखेंगे। हिंदी छंदों के हिसाब से इन्हें अलग अलग लघु (लाम) न गिनकर एक गुरु (गाफ़) गिनेंगे। इन्हें भी कोड (code ) 2 ही देंगे।
इस तरह के मिश्र लघु को ख़फ़ीफ़ यानि हल्का (light) गाम (हल्का गुरु) कहेंगे।
ऊपर के उदाहरणों से- नन, मझ, मुस, कर  आदि।
3) विशुद्ध लघु (real short)- वे हर्फ़ जो छोटी मात्रा युक्त हैं और स्वतंत्र उच्चारित हैं यानि किसी अन्य लघु के साथ मिश्र नहीं हो रहे हैं। इन्हें मुतहर्रिक (लघु मात्रा) भी कहते हैं।
(ज़बर– अ >>> ज़ेर – इ , पेश – उ  तथा हिंदी का ऋ )
इन्हें हम आज़ाद हर् , स्वतंत्र लघु, या आवारा बूंद भी कहेंगे। इसे कोड ( code ) 1 देंगे।
ऊपर के उदाहरणों में- त, ग, कु आदि।
 
ग़ज़ल में मात्राओं के जोड़ के बनिस्पत मात्राओं के क्रम पर विशेष जोर दिया जाता है। सारा खेल मात्रा-क्रम का है। मात्रा-क्रम को ही वज़्न कहते हैं। मात्रा-क्रम सही रखने के लिए हमें मुतहर्रिक यानि आवारा बूंद, स्वतंत्र लघु पर विशेष नज़र रखनी होगी। इस आवारा बूंद की स्थिति सुनिश्चित हो जाने पर, इसके नीचे आने वाली सभी सकील यानि विशुद्ध गुरु की मात्राएँ गिर कर लघु हो जाएगी। सकील (विशुद्ध गुरु) के इस मात्रा-पतन को ज़िहाफ़त कहते हैं।
 
हमें सबसे पहले किसी भी हिलोर को छोटी और बड़ी बूँदों में वियोजित (dissociated) करना हैं। अब इस वियोजित स्वरूप में निम्न को अलग–अलग शिरोरेखा (upper line) में लिखना है।
 
सकील यानि भारी (heavy)  ख़फ़ीफ़ यानि हल्का (light), तथा मुतहर्रिक (लघु मात्रा)
 
अब सकील और ख़फ़ीफ़ को बाइनरी कोड 2 देंगे और मुतहर्रिक को बाइनरी कोड 1 देंगे। इस प्रकार हमारा मात्रा-क्रम यानि मीटर तय हो जाएगा। अब शेष शब्द हमें इसी मीटर में कहने हैं। अगर 1 के नीचे कोई सकील आएगा तो ज़िहाफत की सजा पाकर वो भी 1 हो जाएगा यानि उसकी दीर्घ मात्रा लघु हो जाएगी। उदाहरण-
तराना= 122 को वियोजित (dissociated) करने पर 
त रा ना= 1 2 2 का मीटर मिलता है। अब इसके नीचे आने वाले सभी शब्द इसी मीटर में रहेंगे, चाहे उनका मात्रा भार (योग) 5 हो न हो। देंखे-
तराना= त रा ना= 1 2 2
पुरातन= पु रा तन= 1 2 2 (यहाँ तन को 11 नहीं लिखेंगे, यह खफीफ है अतः 2 कोड है)
शराबी= श रा बी= 1 2 2
मचलकर= म चल कर= 1 2 2
ये दो दिल= य’ दो दिल= 1 2 2 (यहाँ ये 1 के नीचे आ रहा है, अतः ज़िहाफत हुई है)
है चंचल= ह चं चल= 1 2 2  ( यहाँ है को ज़िहाफत की सजा मिली है)
खिलौना= खि लौ ना= 1 2 2
विरासत= वि रा सत= 1 2 2
मुहब्बत= मु हब् बत= 1 2 2
 
इन पर अभ्यास करें- तमन्ना, इज़ाज़त, व्यवस्था, बचाकर, दिवाकर, स्वयंवर
 
वियोजन का उदाहरण देखें–
न तुम बेवफ़ा हो न हम बेवफ़ा हैं
मगर क्या करें अपनी राहें जुदा हैं
 
वियोजित करने पर-
न तुम बे\ व फ़ा हो\ न हम बे\ व फ़ा हैं
1 2 2 \ 1 2 2 \ 1 2 2 \ 1 2 2
म गर क्या\ क़ रें अप\ नि रा हें\ जु दा हैं
1 2 2 \ 1 2 2 \ 1 2 2 \ 1 2 2
 
आपने देखा यहाँ अपनी का नी 1 के नीचे आया इसलिए ज़िहाफत (मात्रा-पतन) की सज़ा पाकर ख़ुद भी 1 हो गया है। ज़िहाफत केवल सकील के साथ ही होगी, क्योंकि खफीफ गुरु तो है लेकिन उस पर कोई दीर्घ मात्रा नहीं है, खफीफ दो छोटी बूंदों (लघुमात्रा) से मिलकर बना है।
 
इस तरह वियोजन करने पर छोटी और बड़ी बूंदों को अलग किया जा सकता है। जैसे-
कमल= क़ मल= 1 2
यहाँ क़ आवारा बूंद या आज़ाद हर्फ़ है। इस पर अभ्यास मज़बूत करना होगा।
अभ्यास- बाइनरी कोड लिखें–
ज्ञान, छात्र, छत्र, मिश्र, मित्रता, कक्षा, दक्ष, क्षमा, विचित्र, विज्ञान, आकृति।
 
इन पाँचों हिलोरों की सतत आवृत्ति से बनने वाली लहरें निम्न हैं-
(साथ में इनके पर्याय हिंदी छंद भी दिए हैं)
 
A. तराना= 1 2 2 की N बार आवृत्ति–
1) 122—122—122—122 = तराना चार कड़ी = भुजंग प्रयात 
2) 122—122—122—12 = तराना साढ़े तीन कड़ी = शक्ति
3) 122—122—122 = तराना तीन कड़ी
4) 122—122—12 = तराना ढाई कड़ी
5) 122—122 = तराना दो कड़ी = नयन
6) 122—12 = तराना डेढ़ कड़ी
7) 122 = तराना एक कड़ी = बाण
 
हिंदी छंदों को ग़ज़ल की पर्याय लहर के स्थान पर लेते समय यति में शिथिलता लेनी होगी।
 
B. झूमकर = 2 1 2 की N आवृत्ति
 
1) 212—212—212—212 = चार कड़ी = अरुण
2) 212—212—212—2 = साढ़े तीन कड़ी = चंद्र
3) 212—212—212 = तीन कड़ी = महालक्ष्मी
4) 212—212—2 = ढाई कड़ी
5) 212—212 = दो कड़ी = विमोहा
6) 212—2 = डेढ़ कड़ी
7) 212 = एक कड़ी
 
C. मुहब्बत का = 1 2 2 2 की N आवृत्ति
 
1) 1222—1222—1222—1222 = चार कड़ी = विधाता
2) 1222—1222—1222—122 = साढ़े तीन कड़ी = दिगंबरी
3) 1222—1222—1222 =  तीन कड़ी = सिंधु
4) 1222—1222—122 = ढाई कड़ी = सुमेरु
5) 1222—1222 = दो कड़ी = विजात
6) 1222—122 = डेढ़ कड़ी = विजातक
7) 1222 = एक कड़ी
 
D. गुनगुनाओ = 2122 की N आवृत्ति
 
1) 2122—2122—2122—2122 = चार कड़ी = माधव मालती
2) 2122—2122—2122—212 = साढ़े तीन कड़ी = गीतिका
3) 2122—2122—2122 = तीन कड़ी = पियूष निर्झर
4) 2122—2122—212 = ढाई कड़ी = पियूष पर्व
5) 2122—2122 = दो कड़ी = मनोरम
6) 2122—212 = डेढ़ कड़ी = मालिका
7) 2122 = एक कड़ी = सुगति
 
इनमें अंतिम हिलोर (आधी कड़ी) का स्वरूप बदलकर (2 , 22 , 21 या 12) और अधिक पर्याय हिंदी छंद समाहित किये जा सकते हैं। नीचे की हिलोर में दिया है।
 
E. हँसते रहो = 2212 की N आवृत्ति
 
1) 2212—2212—2212—2212 = चार कड़ी = हरिगीतिका
2) 2212—2212—2212—22 या 2 = साढ़े तीन कड़ी = माधुरी , मधु रजनी
3) 2212—2212—2212 = तीन कड़ी = मधु वल्लरी
4) 2212—2212—22 या 2  = ढाई कड़ी = मधु मंजरी
5) 2212—2212 = दो कड़ी = मधु मालती
6) 2212—22 या 2 = डेढ़ कड़ी = गंग
7) 2212 = एक कड़ी = सुगति
 
मित्रों मैंने अपनी सरल मति के अनुरूप थोड़ा बहुत लहरों का विवरण रखा है। विद्जन और अधिक विस्तार दे सकते हैं। आगे हम शेष लहरों पर चर्चा और साझा अभ्यास करेंगे। इस साझा मंच पर सभी ग़ज़ल साधकों का स्वागत है। ग़ज़ल के उस्ताद भी चाहें तो हमारी कमियों से हमें अवगत कराकर, हमें आशीर्वाद प्रदान करके इस स्तम्भ को समृद्ध कर सकते हैं।
 
 
सादर

- ख़ुर्शीद खैराड़ी