फरवरी 2016
अंक - 11 | कुल अंक - 53
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

छंद संसार
दोहा छंद
 
फिर से मौसम ठंड का, आने लगा करीब।
फटी रजाई देखकर, चिंतित हुआ गरीब॥
 
सर्दी से ठिरने लगे, मजदूरों के हाथ।
सूरज भी देता नहीं, बेचारों का साथ॥
 
गर्मी में देता रहा, सूरज सिर पर घाम।
सर्दी आते ही चला, करने को विश्राम॥
 
दौलतमंदों के लिये, क्या गर्मी क्या ठंड।
मौसम सर्दी का मगर, है निर्धन को दंड॥
 
सर पर जिनके छत नहीं, वस्त्र न कोई खास।
मौसम सर्दी का उन्हें, कैसे आये रास॥
 
तन ढकने के वास्ते, जिन पर नहीं छदाम।
उनका सूखी ठंड में, क्या होगा हे राम॥
 
जिनके पीछे है लगा, निर्धनता का रोग।
दिन काटेंगे किस तरह, सर्दी में वह लोग॥
 
अपना-अपना कर लिया, सबने बंदोबस्त।
केवल एक गरीब ही, है सर्दी में पस्त॥
 
सर्दी है या मौत की, दुखदाई सौगात।
पूछो तो फुटपाथ से, कैसे बीती रात॥
 
सर्दी में पूछी नहीं, अपनों ने भी बात।
दांत किटकिटाता रहा, बूढ़ा सारी रात॥

- महावीर सिंह वीर

रचनाकार परिचय
महावीर सिंह वीर

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