प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जनवरी 2016
अंक -46

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

बाल कहानी
बाल कहानी- फेसबुक की सहायता
 
दो सहेलियां थीं। गार्गी और तान्या। दोनों एक ही कक्षा में पढ़ती थीं। वे स्कूल साथ जातीं और घर भी साथ ही लौटतीं। दोनों के घर आमने-सामने ही थे। छुट्टी के दिन भी दोनों अधिकतर समय साथ बिताते। सब कुछ ठीक चल रहा था। एक दिन अचानक तान्या के पापा घर में कंप्यूटर ले आए। तान्या दौड़कर गार्गी को बुला लाई। दोनों ने कंप्यूटर का खूब आनंद उठाया। तान्या ने झट से अपना ई मेल खाता खोल लिया। दूसरे ही क्षण उसने गार्गी का खाता भी खोल दिया। दोनों ने पहला संदेश एक-दूसरे को मेल भी कर दिया।
गार्गी ने कहा-‘‘तान्या। नेट में फेसबुक भी तो है। उस दिन बड़ी मैम ने क्लास में बताया था न। उसमें हम बहुत सारे दोस्त बना सकते हैं!’’ कुछ देर माथापच्ची करने के बाद दोनों फेसबुक तक पहुंच ही गए। तान्या ने पहले अपना और फिर गार्गी का खाता खोलने में सफलता भी हासिल कर ली। तान्या चहकते हुए बोली-‘‘हमारी दोस्ती अपनी जगह है और नियम अपनी जगह हैं। ले। तू अपने ई मेल का भी और फेसबुक का भी पासवर्ड बदल ले। तब तक मैं मम्मी से कुछ खाने के लिए कहती हूँ। बस मैं अभी गई और अभी आई।’’ यह कहकर तान्या चली गई। 
अब दोनों का कंप्यूटर पर अक्सर झुके रहना नई बात नहीं रह गई थी। कई बार तान्या की मम्मी ने उन दोनों को टोक भी दिया था। आज तो हद ही हो गई। दोनों स्कूल से घर आईं तो फेसबुक में व्यस्त हो गईं। गार्गी अपने घर जाना ही भूल गई। गार्गी की मम्मी खोजते हुए तान्या के घर आ पहुंची। गार्गी को डांटते हुए खींचकर घर ले गई। गार्गी को अब तान्या के घर आने-जाने से पहले अपनी मम्मी को पूछना पड़ता था। 
एक दिन गार्गी के घर में भी कंप्यूटर आ गया। पहले ही दिन उसे पापा से हिदायत मिल गई-‘‘सुनो गार्गी। कंप्यूटर सिर्फ एक मशीन है। उसे कैसे और कितना इस्तेमाल करना है ये तुम पर निर्भर है। याद रखना मुझे ये कभी न लगे कि तुम कंप्यूटर पर अपना समय बरबाद कर रही हो।’’ गार्गी ने हामी भर दी। 
आज स्कूल की प्रातःकालीन सभा में एक सूचना से गार्गी और तान्या बेहद खुश थीं। घर लौटते समय गार्गी ने तान्या से पूछा-‘‘अगर हम दोनों स्काॅलरशिप वाली परीक्षा में टाॅप टेन में आ गए तो कितना मज़ा आएगा न? पूरे पांच साल हमें पांच सौ रुपए हर महीना मिलेगा!’’ तान्या कंधे उचकाते हुए बोली-‘‘अभी तो पूरे तीन महीने हैं। यह परीक्षा सामान्य ज्ञान पर आधारित होगी। मैं तो सब कुछ गूगल पर सर्च कर लूंगी। पता है फेसबुक में मेरे एक हजार से अधिक दोस्त बन गए हैं। वो कब काम आएंगे।’’
गार्गी चैंकते हुए बोली-‘‘एक हजार ! मेरे तो अभी तीस ही दोस्त बने हैं। पापा-मम्मी ज़्यादा देर कंप्यूटर में बैठने ही नहीं देते।’’ गार्गी उदास भाव से बोली। ‘‘पागल है तू। मैं तो जब सब सो जाते हैं,तब फेसबुक पे आती हूं। कई बार तो कह देती हूं कि गूगल पर कुछ क्वेश्चन के आनसर ढूंढ रही हूं। मम्मी-पापा कभी आ गए तो उनके स्क्रीन पर आने से पहले फेसबुक की विन्डो झट से बंद भी कर देती हूं। तू भी यार।’’ तान्या ने गार्गी को चिढ़ाना चाहा। दोनों हंसते-खेलते घर लौट आए।
अब तक गार्गी और तान्या का स्कूल में प्रदर्शन ठीक-ठाक था। स्कूल के खेल और अन्य गतिविधियों में दोनों बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेतीं और उम्मीद से अच्छा प्रदर्शन करती। परीक्षा में दोनों कक्षा की सबसे मेधावी छात्राओं में थीं। लेकिन छात्रवृत्ति की परीक्षा ने सभी को चैंका दिया। गार्गी ने टाॅप टेन में तीसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं तान्या इस परीक्षा में न्यूनतम अंक भी हासिल नहीं कर पाई। 
सब उन दस बच्चों को बधाई दे रहे थे जिन्होंने छात्रवृत्ति की परीक्षा में सर्वोच्च अंक हासिल किये। तान्या ने भी गार्गी को बधाई दी। गार्गी ने धीमे से कहा-‘‘तान्या। साॅरी यार। मैं तो सोच रही थी कि हम दोनों को स्काॅलरशिप मिलेगी। लेकिन......यार पेपर तो तेरा भी अच्छा हुआ था न? फिर तेरा नाम टाॅप टेन की लिस्ट में क्यों नहीं आया? कहीं एक्जामनर ने तेरी काॅपी ठीक से ही न जांची हो। चल प्रिंसीपल मैम से बात करते हैं। क्या पता......।’’ गार्गी आगे कुछ नहीं कह पाई।
‘‘साॅरी तो मुझे कहना चाहिए गार्गी। दरअसल मैंने तुझसे झूठ बोला था। मेरा पेपर ही अच्छा नहीं गया था। अच्छा होता भी कैसे। मेरी तैयारी ही अच्छी नहीं हुई थी। चल छोड़। अब इस टाॅपिक को रहने दे।’’ तान्या ने गार्गी का हाथ पकड़ते हुए कहा। गार्गी आश्चर्य से तान्या की बात सुन रही थी। वह बोली-‘‘अब तान्या। तू घर में क्या कहेगी?’’
तान्या ने कहा-‘‘अब क्या हो सकता है। मैंने सुनहरा अवसर खो दिया है। मैं फेसबुक के चक्कर में पड़ी रही। गूगल में सर्च करना मुझे आसान लगा। दिन बीतते गए। मैंने सोचा कि छुट्टियों में नोट्स बना लंूगी। छुट्टियों में मम्मी-पापा ने घूमने का टूर बना लिया। बस मस्ती में तैयारी को तो मैं भूल ही गई। फेसबुक के दोस्त सिवाय जोक्स और हंसी-मजाक की बातों में ज्यादा दिलचस्पी लेते रहे। कुछ प्रश्न मैंने अपनी वाल में लिखे तो किसी ने कोई रिस्पांस ही नहीं दिया। रही बात घर की तो मम्मी-पापा ने मुझे कई बार सावधान भी किया था। उन्हें पता है कि मैं अच्छा स्कोर नहीं कर पाऊंगी।’’
गार्गी ने कहा-‘‘चल कोई बात नहीं। क्या पता इस साल फिर ये योजना आए।’’ तान्या ने कंधे उचकाते हुए कहा-‘‘क्या पता। लेकिन गार्गी। मैंने तय कर लिया है कि मैं इस सालाना परीक्षा में बेस्ट स्टूडेंट बन कर दिखाऊंगी। बेस्ट स्टूडेंट को मिलने वाला एवार्ड में जीत कर दिखाऊंगी। लेकिन तू मेरी मदद करेगी न?’’
गार्गी ने तान्या की हथेली चूमते हुए कहा-‘‘प्राॅमिस। मैं भी यही चाहती हूं। अब हम दोनों फेसबुक में एक दूसरे की वाल पर सामान्य ज्ञान की बातें और उससे जुड़े हुए प्रश्न डालेंगे। एक प्रश्न मैं पूछूंगी और उसका जवाब तू देगी। फिर तू एक प्रश्न पूछेगी और मैं उसका जवाब दूंगी। हमारी तैयारी भी होती रहेगी और हम फेसबुक को इनज्वाय भी करेंगे। प्राॅमिस।’’ तान्या को गार्गी का यह सुझाव पसंद आया। उसने कहा-‘‘प्राॅमिस।’’ दोनो हंसते हुए घर की ओर चल दिये।

- मनोहर चमोली मनु
 
रचनाकार परिचय
मनोहर चमोली मनु

पत्रिका में आपका योगदान . . .
बाल-वाटिका (3)