प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अक्टूबर 2015
अंक -53

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

साहित्यिक समाचार

‘सृजना’ के तत्त्वावधान में गीतकार रजनी मोरवाल का एकल काव्य-पाठ

जोधपुर, 2 अक्टूबर। कला, साहित्य, संस्कृति विमर्श के लिए प्रतिबद्ध ‘सृजना’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘सेमल के गाँव से’, अंजुरी भर प्रीति’, ‘दोहा सतसई’ किताबों की रचनाकार देश की ख्यातनाम गीतकार रजनी मोरवाल ने अपने विभिन्न कलेवर वाले गीतों से श्रोताओं को हिंदी नवगीत की ऊंचाइयों से रूबरू करवाया।

होटल 'तुलसी इन' में आयोजित रजनी मोरवाल के नाम की गयी इस शाम में उन्होंने गीत से नवगीत की यात्रा में आये बदलावों की चर्चा करते हुए कहा कि नवगीत में छंद के अनुशासन को स्वीकारते हुए भी आधुनिक संत्रास भरी चुनौतियों को अभिव्यक्त करने की ख़ूबी है। इस अवसर पर उन्होंने अपने काव्य गुरु डॉ. किशोर काबरा का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।

 

अपने एकल पाठ में उन्होंने रोजमर्रा के जीवन, सृजन प्रक्रिया, स्त्री संवेदना और मानवीय सरोकारों से जुड़े 14 गीत प्रस्तुत किये, जिनमें से कुछ गीतों का उन्होंने सस्वर पाठ भी किया। ‘गीत मेरे आ रही हूँ’, 'हो रही वीरान क्यूँ मेरे शहर की हर गली’, ‘इस जहाँ में भूख ही तो आदमी का धर्म है’, ‘पीड़ा ने मेरी नगरी में जाने क्यूँ डाले हैं डेरे’, ‘बरसों यूँ ही बीत गये हैं सपनों को घर तक आने में’ तथा ‘बहुत दिनों के बाद गाँव से माँजी आई हैं’ गीतों पर उन्हें भरपूर दाद मिली। श्रोताओं के अनुरोध पर उन्होंने अपनी चर्चित कहानी ‘पच्चीस बरस बाद' भी सुनाई। इस अवसर पर रजनी मोरवाल ने अपने सृजन से संबंधित प्रक्रिया, चुनौतियों, अनुभवों, पद्य के अतिरिक्त कथा रचते हुए भाषा शैली में अनुभूति स्तर पर आने वाले परिवर्तनों से संबंधित श्रोताओं की जिज्ञासाओं के प्रतिउत्तर भी दिए।


प्रारंभ में आयोजन के संचालक डॉ. हरीदास व्यास ने अतिथि गीतकार का परिचय करवाते हुए इन गीतों के नये मुहावरे, कथ्य और नई चेतना का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक जीवन के तमाम विरोधाभासों, अंतर्द्वंद को रजनी मोरवाल के गीतों ने एक नई रवानगी दी है। छंद के अनुशासन का पूरा सम्मान करते हुए रजनी ने इस दौर की संवेदनाओं को एक प्रभावी, सुरीला पर सच्चा चेहरा दिया है। कार्यक्रम में हबीब कैफ़ी, हरिगोपाल राठी, कमलेश तिवारी, राकेश मूथा, शैलेन्द्र ढढ़ा, आकाश मिड्ढा, अनुराधा श्रीवास्तव, सुप्रिया दत्ता सहित अनेक रचनाकर्मी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के अंत में सृजना की अध्यक्षा सुषमा चौहान ने अतिथि गीतकार रजनी मोरवाल, उनके रचनाकर्म के लिए मानक जीवन साथी मंगल मोरवाल, होटल संचालक युधिष्ठिर भाटी, मीडिया कर्मियों, आगंतुक साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।
 


- डॉ. हरीदास व्यास
 
रचनाकार परिचय
डॉ. हरीदास व्यास

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