जनवरी 2020
अंक - 56 | कुल अंक - 56
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

उभरते स्वर
गुरु कृपा
 
चाँद, मंगल, बृहस्पति क्या,
कृपा हो गुरुवर आपकी,
तो सूरज को भी मापें हम।
 
धागों-से उलझे,
दुनिया के तानों-बानों में,
कृपा बरसे गुरुवर आपकी,
तो खुद को पहचानें हम।
 
नव उत्साह से,नव-संकल्प कर,
चल पड़ें नव डगर पर,
पथ-प्रदर्शक गुरुवर हमारे,
नव-विहान ले आयें हम।
 
आपकी गुरुता के हम,
आभारी हैं, आभारी रहेंगे,
कृपा हो गुरुवर आपकी,
तो धन्य-धन्य हो जायें हम।
 
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परिधान
 
 
दया, प्रेम, करुणा , ममता का भाव नहीं,
न भले - बुरे की पहचान।
ऐसे व्यक्तित्व का कोई मोल नहीं,
चाहे सुंदर पहने परिधान।
 
मीठी न जिसकी वाणी,
जिह्वा उसकी कटार।
भाई-बंधु,सखा-मित्र सब,
साथ छोड़ेंगे बीच मझधार।
 
धन -दौलत के मद में चूर,
दिखलाते झूठी शान।
व्यर्थ वह मानव जीवन,
जो किया न सुपात्र को दान।
 
तन की बाहरी साज-सज्जा,
देती पल भर की मुस्कान।
जीवन को मुखरित करें,
पहन इंसानियत का परिधान।
 

- रानी कुमारी

रचनाकार परिचय
रानी कुमारी

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