दिसम्बर 2019
अंक - 55 | कुल अंक - 56
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ख़बरनामा

कवि कुंभ और बीइंग वूमन की ओर से प्रसिद्ध शायरा परवीन शाकिर की याद में मुशायरा
 



मौला मुझे इत्र-सा महकने का हुनर दे
जिस सिम्त भी जाऊँ ख़ुशबू-सा बिखर जाऊँ


दून की वरिष्ठ शायरा रंजीता 'फ़लक' के इस शेर ने महफ़िल लूट ली। मौका था कवि कुंभ और बीइंग वूमन की तरफ से 'रंग-ए-परवीन शाकिर' के उनवान से आयोजित मुशायरे का। प्रख्यात शायरा परवीन शाकिर की याद में तस्मिया अकादमी में आयोजित इस मुशायरे में स्थानीय शायरों के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर की महिला शायराओं ने भी हिस्सा लिया। दो सत्रों में आयोजित इस कार्यक्रम में रंजीता फ़लक की पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें प्रख्यात शायरों और कवियों के साक्षात्कार लिए गये हैं।

कार्यक्रम के पहले हिस्से में परवीन शाकिर की शायरी से लोगों को रुबरु कराया गया और इसके बाद शायरों ने अपने कलाम पढे। दिल्ली से आयीं शायरा राशिदा बाकी ज़िया ने ग़ालिब के रदीफ़ पर ग़ज़ल-


जब टूटा तमन्नाओं का शीशा मेरे आगे
मेरा ही सरापा था जो बिखरा मेरे आगे


सुनाकर महफिल का रंग ही बदल दिया। इससे पहले देश-विदेश में अपने कलाम से धूम मचाने वाली लोकप्रिय शायरा अलीना इतरत ने जब ये शेर-

अभी तो चाक पे जारी है रक्स मिट्टी का
अभी कुम्हार की नीयत बदल भी सकती है


पढ़ा तो सारी महफिल झूम उठी। अलीना और हया ने अपने कुछ और कलाम सुनाकर मुशायरे को उरुज पर पहुँचाया।

इससे पहले, कानपुर से आये शायर पुष्पेंद्र 'पुष्प' के शेर-


ख़ूब रोका ठगा खिजां ने क्या करें,
हम बहारों के कहे में आ गये


ने भी ख़ूब दाद बटोरी। ग़ज़ाला ख़ान का शेर-

ज़िन्दगी माँगती रहती है साँसों का हिसाब
कोई आराम नहीं मौत के आराम के बाद


और जसकिरन चोपड़ा ने-

कुछ लोग अब यहाँ के सुल्तान हो गये
उन्हीं के हवाले ये मेरा शहर हो गया


शेर भी ख़ूब पसंद किया गया। दर्द गढ़वाली के चार मिसरों-

मुहब्बत का पुजारी हूँ तिजारत कर नहीं सकता
किसी का दिल दुखे जिससे शरारत कर नहीं सकता।
उसूलों पर मैं चलता हूँ अमीरे-शहर से कह दो,
अना वाला हूँ मैं उसकी इबादत कर नहीं सकता।।


को भी पसंद किया गया। इसके अलावा, मीरा नवेली के शेर-

घूंट भर चाँदनी पी थी कभी मुहब्बत की
हमसे न पूछिए चाँद का स्वाद कैसा है


को भी दाद से नवाज़ा गया। ममता वेद के शेर-

दर्द-ए-दिल तब भी था लेकिन तुम कभी न रोए
आज अश्कों का समंदर क्यों बहाया तुमने


और विवेक बादल बाजपुरी के शेर-

बेटियों से गुरेज है जिनको
उनके आँगन ख़ुशी को तरसेंगे


भी पसंद किए गये। इससे पहले उत्तराखंड हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष डॉ. रामविनय सिंह ने पुस्तक की समीक्षा की। रंजीता फ़लक के संचालन में नीलमप्रभा वर्मा, नदीम बर्नी, शादाब अली, रईस फिगार, परवेज गाजी, शौहर जलालाबादी, कविता बिष्ट, निकी पुष्कर आदि ने भी कलाम पढे। शहर के प्रसिद्ध उद्यमी डॉ. एस. फारुख और आइ.ए.एस. अधिकारी इंदू कुमार पांडे ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस मौके पर आर.के. बख्शी, एम.एल. सकलानी, रजनीश त्रिवेदी, गौरव कुमार, विशंभरनाथ बजाज आदि मौजूद थे।

(ख़बर सौजन्य: लक्ष्मी प्रसाद बडोनी 'दर्द गढ़वाली')






रू-ब-रू प्रोग्राम में बरसे उर्दू शायरी के रंग


 



आज अंदाज़-ए-ग़ज़ल, श्री गंगानगर द्वारा आयोजित प्रोग्राम रू-ब-रू में हरियाणा के युवा शायर जनाब हरमन दिनेश ने अपनी ख़ूबसूरत उर्दू ग़ज़लों और शेर-ओ-शायरी से समां बाँधा। सेठ जी.एल. बिहाणी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सुखाड़िया सर्किल, श्री गंगानगर में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने 'रात भर तेरी यादों में, आख़री इश्क तेरी आँखें, मैं था अश्क़बार जंगल था, यूँ लगे है कि ख़ुदाई है मेरे हाथों में, हक़ीक़त जान पड़ते थे कभी जो, तनहाई से अच्छी कोई ग़ज़ल नहीं, ये तबीयत तेरी जो गिरांबार है ये मेरी हार है, हिज़्र में जो वस्ल का एहसास है वो शायरी है, मुहब्बत के लिए मौला मेरे इतना तो कर देता, मैं तेरे लम्स को आग़ोश में संभाले हूँ तथा और एक से बढ़कर एक ख़ूबसूरत ग़ज़लों और शेरों की बरसात की।

प्रोग्राम के शुरू में अंदाज़-ए-ग़ज़ल के अध्यक्ष बन्नी गंगानगरी द्वारा मेहमान शायर का परिचय दिया गया। श्री हरमन दिनेश ने अपने निजी परिचय और अब तक के अपने अदबी सफ़र के बारे में बताते हुए लगातार एक घंटे तक अपना कलाम पेश किया। उपस्थित श्रोताओं में से उनकी जिज्ञासाओं के उत्तर दिये। प्रसिद्ध आलोचक एवं रंगकर्मी श्री भूपेन्द्र सिंह ने हरमन की शायरी को शानदार शायरी बताया। प्रोग्राम में अध्यक्षता वैद्य श्री लक्ष्मी नारायण शर्मा ने की और विशिष्ट अतिथि श्रीमती ममता आहुजा थीं।

संस्था की ओर से जनाब हरमन दिनेश को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया तथा 'निशान-ए-एज़ाज़' भेंट किया गया। सेठ जी.एल. बिहाणी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की तरफ से भी उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं विशिष्ट अतिथि को स्मृति स्वरूप पुस्तकें भेंट की गयीं। मंच संचालन कु. रिशिका द्वारा बड़ी ख़ूबसूरती से किया गया। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित शायर कवि और साहित्यकार डॉ. कृष्ण आशु, संदेश त्यागी, अरूण खामखां, रमेशचंद्र गुप्ता, योगराज भाटिया, ओ.पी. वैश्य, राकेश मितवा, सुरेश कनवाड़िया, राजेन्द्र लवली, रितू सिंह, सत्यपाल जोइया, हर्ष नागपाल, आरती बजाज, बी.एस. चौहान, हर इकबाल सिंह, वीरेंदर खुराना आदि मौजूद थे। श्री सुरेश कनवाड़िया द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

(ख़बर सौजन्य: बन्नी गंगानगरी)






वरिष्ठ कवि एवं ग़ज़लकार डॉ. डी.एम. मिश्र सेवक साहित्य श्री सम्मान- 2019


 



वाराणसी की गौरवशाली साहित्यिक संस्था 'साहित्यिक संघ, वाराणसी' के 28 वें वार्षिक अधिवेशन के अवसर पर वरिष्ठ कवि एवं ग़ज़लकार डॉ. डी.एम. मिश्र को आदर्श सेवा इंटर कॉलेज, वाराणसी के सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में 'सेवक साहित्य श्री सम्मान- 2019' से नवाज़ा गया। उन्हें यह सम्मान प्रोफेसर गिरीश्वर मिश्र, पूर्व कुलपति महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर डॉ. डी.एम. मिश्र की रचनाशीलता पर प्रकाश डालते हुए वाराणसी से निकलने वाली बहुचर्चित मासिक साहित्यिक पत्रिका 'सोच विचार' के प्रधान सम्पादक डॉ. जितेन्द्र नाथ मिश्र ने कहा कि डॉ. डी.एम. मिश्र ने ग़ज़ल की दुनिया में उत्कृष्ट कार्य किया है। उनके दस कविता एवं ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हैं। इसी वर्ष प्रकाशित उनका नया ग़ज़ल संग्रह 'वो पता ढूँढें हमारा' बहुत कम समय में बहुत लोकप्रिय हुआ है, जिसके लिए यह संस्था उन्हें सम्मानित कर रही है।

इस अवसर पर सोच विचार पत्रिका के संपादक नरेन्द्र नाथ मिश्र, सहायक संपादक वासुदेव उबेराय, कवि अभिनव अरुण, भोपाल से डॉ. सुमन चौरे, चन्द्रभान राही, मुजफ्फरपुर से डॉ. अंजना वर्मा, रायपुर से डॉ. गिरीश पंकज, इन्दौर से डॉ. अश्विनी कुमार दुबे, गाजीपुर से डॉ. रामबदन राय, बरेली से डॉ. सुरेश बाबू मिश्र जैसी नामचीन साहित्यिक हस्तियाँ भी कार्यक्रम में मौजूद थीं। इसके बाद देर रात तक कवि सम्मेलन का दौर चला।


(ख़बर सौजन्य: डॉ. डी. एम. मिश्र)


- टीम हस्ताक्षर