दिसम्बर 2019
अंक - 55 | कुल अंक - 56
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
उद्बोधनपञ्चकम्
   
               बागपतम्
 
चत्वारो निहता: प्रभातसमये दैत्या बलात्कारिण:
          तप्तं मे हृदयं निशम्य वचनं जातं प्रशीतं द्रुतम्।
अन्ये ये निवसन्ति केचिदपरे काराश्रिता दानवा:
        मार्यन्तामविलम्बमेव न चिरं कालो वृथा नीयताम्।।१
 
भाषन्ते बहवो वृथा श्रुतमहो यत् तद् विमुक्तानना:
          नैते किं मनुजा विशालगुणिनस्ते निर्भयं निर्भयाम्।
पश्यन्तीव सुतां मृतां सविनयं तान् प्रार्थये सादरं
          दैत्यानां हनने भवन्ति नहि भो दोषा बुधैर्मन्यते।। २
 
कार्यं नैव करोति शासनमये दीर्घस्वरैराहता:
          गायन्तीव कथां स्वचत्वरगता भित्वा गलं सस्वरम्।
नीता मृत्युगृहं खला: सपदि ते श्रुत्वाप्यहो किन्नरा:
        निन्दन्तो निगदन्ति हन्त विहितं चैनं वधं दुर्जना:।। ३
 
नो कुर्याद् यदि शासनं समयतो न्यायं ततो हे जना:
         दैत्यानां जनरक्षकैर्भवतु वा शीघ्रं वधो दुष्कृताम्।
यावन्नैव भयं न तावदहहा कन्याजनो रक्षित:
       तस्माद् दुष्टनरा: स्वयं गुलिकया प्रेष्या द्रुतं कामये।। ४
 
भेदो नैव भवेन्न चापि भवताद्  वा  राजनीति: क्वचित्
   कन्यानां विषये भवन्तु निखिला बद्ध्वा कटिं सज्जना:।
नीत्वा पाणियुगे स्वशस्त्रमचिरं  कन्यासुरक्षाकृते
  सज्जास्सन्ति भटास्स्वसैनिकवरा दुष्टात्मनां घातका:।५

- डॉ. अरविन्द तिवारी