प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
सितम्बर - अक्टूबर 2019 (संयुक्तांक)
अंक -53

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
परिदेवना
 
न कथयामि किमपि
न परिदेवना
नैव व्याघात:।
न जानामि
त्वं आगतवान न वा!
किन्तु यदा
पुष्पेषु पतंङ्गा:
पुनश्चपुन :कथयति
किमपि
तदा श्रृणोम्यहम्
सा परिदेवना।
मध्यान्हे
सूर्यकिरणानि
क्रीडन्ति जलेषु
मत्स्येन सह जलमग्नौव भूत्वा,
तदा
क:वदति
त्वं नागता:!
सांध्यकाले
गर्भगृहे
दीपो प्रज्वलामि,
तदा प्रकाशोभूत्वा
क:वदति त्वं न.....।
नास्ति एषा परिदेवना प्रिय!
वार्ता केवलमस्ति
त्वं नैव आगतवान।
 

- डॉ. रीता त्रिवेदी
 
रचनाकार परिचय
डॉ. रीता त्रिवेदी

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जयतु संस्कृतम् (1)