प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अक्टूबर 2015
अंक -47

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

दोहा गीत

मेरा प्यारा देश है, अपना हिन्दुस्तान

रक्षा करते देश की, अपना सीना तान
मेरा प्यारा देश है, अपना हिन्दुस्तान

सीमा पर फौजी सभी, पहरा दे दिन रात
शपथ तिरंगे की लिये, भूले अपनी जात
पीठ दिखाना पाप है, जान करे कुर्बान
मेरा प्यारा देश है, अपना हिन्दुस्तान

सत्यमेव जयते लिखे, लिये तिरंगा हाथ
जात-पात को भूलकर, दौड़ रहे सब साथ
सर्व धर्म सद्भाव की, बनी यहाँ पहचान
मेरा प्यारा देश है, अपना हिन्दुस्तान

संकट में सब एक हैं, पंथ करे क्या भिन्न
देश हमारा एक है, जुड़कर सभी अभिन्न
ईद दिवाली साथ मने, ये भारत की शान
मेरा प्यारा देश है, अपना हिन्दुस्तान

आतंकी को मारते, भारत माँ के लाल
मातृ भक्त ये देश के, इनकी कहाँ मिसाल
जन्मे जो इस देश में, मातृभूमि की आन
मेरा प्यारा देश है, अपना हिन्दुस्तान


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चल नदिया की तीर

मानवता के पाठ ही, सत्य सनातन धर्म
अपनाते जो भी इन्हें, करते वे सद्कर्म
शिक्षा दे सद्कर्म की, साधू संत फकीर
उनसे मिलना हो अगर, चल नदिया की तीर

गंगा तट पर ही मिला, संतों को सन्मार्ग
पाषाणों को तोड़कर, गंगा चुनती  मार्ग
कुछ बूंदें भी ज्ञान की, बदल सके तकदीर
नमन करे उस भूमि को, चल नदिया के तीर

काम क्रोध मद मोह सब, अहंकार अभिमान
दुश्मन ये सब मनुज के, राजा रंक समान
काम क्रोध मद मोह से, लालच रहित शरीर
करना हो संकल्प तो, चल कर नदिया तीर

वन उपवन सुरभित हुए, वृक्ष धरे श्रृंगार
नदियों का ही मानिये, बहुत बड़ा आभार
नदियों के ही पास में, बसते कुञ्ज कुटीर
सुन पक्षी के बोल तो, चल नदिया के तीर

एकाकीपन साँझ का, मन विचलित कर जाय
इस पड़ाव पर उम्र के, नदिया बने सहाय
दूर करें तन पाप के, निर्मल गंगा नीर
शान्ति मिले मन को वही, चल नदिया के तीर


- लक्ष्मण रामानुज लडीवाला
 
रचनाकार परिचय
लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

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