जुलाई 2019
अंक - 51 | कुल अंक - 53
प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल-

सैंकड़ों उन्वान देकर इक फ़साना बँट गया
अब तो पुरखों का मकां भी ख़ाना-ख़ाना बँट गया

आज से पहले कभी आबो-हवा ऐसी न थी
दिल बँटा, नफ़रत बँटी फिर आशियाना बँट गया

शाम थी तो साथ थे सब, दिन निकलते क्या हुआ
पेड़ के हर इक परिंदे का ठिकाना बँट गया

क़ौमी यकजहती का मंज़र अब कहाँ देखेंगे लोग
इन्तिहा ये है कि अपना बादाख़ाना बँट गया

एक मसलक से न जाने कितने ही मसलक बने
अब कहाँ सज़दा करें जब आस्ताना बँट गया

दस्ते-मेहनतकश जो ख़ाली था वो ख़ाली ही रहा
हो गया खलिहान ख़ाली दाना-दाना बँट गया


उन्वान= शीर्षक
क़ौमी यकजहती= साम्प्रदायिक सदभाव
बादाख़ाना= मधुशाला
मसलक= पंथ
आस्ताना= चौखट


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ग़ज़ल-

नफ़रत ही रह गयी है मुहब्बत चली गयी
घर से हमारे रूठ के बरक़त चली गयी

हम भी ख़ुशी के नाज़ उठाते कहाँ तलक
अच्छा हुआ कि घर से मुसीबत चली गयी

दो भाइयों के बीच की नफ़रत न पूछिए
घर से निकल के बात अदालत चली गयी

अच्छा था हम ग़रीब थे इन्सानियत तो थी
ग़ुरबत से जान छूटी शराफ़त चली गयी

दौलत का ये ग़ुरूर भी कितना अजीब है
दस्तार बच गयी तो रियासत चली गयी

ख़ंजर चला, न ख़ून का दरिया बहा कोई
नज़रों से क़त्ल कर के क़यामत चली गयी

आवाज़ अपने दिल की मैं सुनता भी किस तरह
दुनिया के शोरगुल में समाअत चली गयी

हमने ही ख़ुद ज़मीं को जहन्नुम बना दिया
हिर्सो-हवस में हाथ से जन्नत चली गयी

फूलों पे तितलियों का वो जादू चला 'किरन'
अपनी हदों के पार मुहब्बत चली गयी


नाज़= नखरा
दस्तार= पगड़ी
ग़ुरबत= निर्धनता


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ग़ज़ल-

आबाद उसके नाम पे दूकान हैं बहुत
किस पर यक़ीन कीजिए भगवान हैं बहुत

जितना सुकून घर में है बाज़ार में नहीं
हिर्सो-हवस के दश्त में तूफ़ान हैं बहुत

नेकी, वफ़ा, ख़ुलूस, शराफ़त कि दोस्ती
इस दौर में ये रास्ते वीरान हैं बहुत

थोड़ी-सी कजरवी भी ग़ज़ब काम कर गयी
दुश्वार थे जो मरहले आसान हैं बहुत

दुनिया के दांव-पेंच से मानूस हो गये
यारो! तुम्हारी बज़्म के एहसान हैं बहुत

ये अक़्स अपना है कि किसी दूसरे का है
ख़ुद को 'किरन' सँवार के हैरान हैं बहुत


हिर्सो-हवस= लोभ-लालच
दश्त= जंगल
ख़ुलूस= प्यार
कजरवी= टेढ़ापन
मरहले= मंज़िल
मानूस= परिचित
बज़्म= महफ़िल
अक़्स= परछाई


- प्रेमकिरण

रचनाकार परिचय
प्रेमकिरण

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