प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जुलाई 2019
अंक -53

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
के विनिर्याता:?
 
शनैर्निर्वाप्य दीपं ये गृहद्वाराद्विनिर्याता:।
सखायो हन्त हृत्संस्था न सर्वे के विनिर्याता:? 1
 
प्रदास्याम: सखे रक्तं परं न: हा पृथक् नूनम्।
प्रभाष्यैते स्मितास्या नो सखाय: के विनिर्याता:?2
 
रुजार्तं मामिमे द्रष्टुं सभार्याश्चागता द्वित्रा:।
मदीयं चौषधं हृत्वा न धन्या: के विनिर्याता:?।। 3
 
पृच्छन्तं मां जनं ये चोक्तवन्तो मित्रका मूढम्।
पुनर्मे शेमुषीं श्रुत्वा न गोष्ठ्या: के विनिर्याता:?।4
 
अयं गेह: इयं गन्त्री इदं सर्वं तवैवाहो।
परं सूचीं न दातुं तेऽसमर्था: के विनिर्याता:?। 5
 
मदीयं जीवनं मान्यं सखे संस्कृतविकासार्थम्।
रुदत् ते संस्कृतं दृष्ट्वा न तूष्णीं के विनिर्याता: ?।। 6
 
'मृषा पृथ्वी कुटुम्बं न:' वदन्तीमे बुधा दिव्यम्।
विधातुं हेऽरविन्द स्वं गृहं नो के विनिर्याता:?।। 7
 

- डॉ. अरविन्द तिवारी