प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अक्टूबर 2015
अंक -38

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

साहित्यिक समाचार

काव्यमंच जोधपुर की प्रथम वर्षगांठ पर काव्य-गोष्ठी का आयोजन

 

काव्यमंच जोधपुर की प्रथम वर्षगांठ पर रविवार 27 सितम्बर को नेहरु पार्क स्थित डॉ. मदन डागा साहित्य भवन में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन गया। काव्यमंच के अध्यक्ष शैलेन्द्र ढड्ढा ने बताया कि गोष्ठी में राजस्थानी, उर्दू व हिंदी भाषाओँ के कवियों ने काव्यपाठ किया। गोष्ठी का संचालन कल्याण के. विश्नोई और मधुर परिहार द्वारा किया गया।

गोष्ठी का प्रारंभ गीतांजलि व्यास की कविता ‘सीमा पर जाने वाले तिरंगा फहराने वाले, करी है देश की रक्षा ओ फौजी तेरे हवाले’ से हुआ। आकाश मिड्ढा ने ‘खर्च हुए न जाने किस किस तरह से हम उनके लिए’, के.डी.चारण ने ‘रजनीगंधा का विपर्याय, एल.सी.रावतानी ने ‘भारत की बेटियों को कम नहीं आँके’, सुशील एम. व्यास ने ‘ज़िंदगी अँधेरे की छटपटाहट है, यहाँ कदम कदम पर मौत की आहट है’ सुनाकर सिलसिले को आगे बढ़ाया। फ़ानी जोधपुरी ने बेहतरीन नज़्म ‘इश्क हूँ मुझे लोगों ने है बदनाम किया’, नेमीचंद पारीक ने ‘आंखों को आईना लिख, दरिया देख जजीरा लिख’ ग़ज़ल पेश कर कार्यक्रम को ऊचाई दी। आकाश 'नौरंगी' ने नौजवानों को संबोधित करते हुए ‘तुम्हारी हिम्मतों से विश्व के इतिहास बदले हैं, जमीं बदली, समुद्र बदले और आकाश बदले हैं’ रचना प्रस्तुत की। वाजिद हसन काजी ने ‘सुपनों अर जथारथ’ सुनाकर गोष्ठी में राजस्थानी भाषा की मिठास घोल दी। कमलेश तिवारी ने ‘बहुत हुआ सतरंगे सपने, बहुत हुआ अब तुम जाओ, व्यर्थ भ्रमों के जाल बिछा कर और न मुझको उलझाओ’ रचना पेश कर चिंतन को नया आयाम दिया।

कार्यक्रम में अनिल अनवर, शैलेन्द्र ढड्ढा, अशफ़ाक फौजदार, दीपा राव, सारा शारदा, विजया बाली, सुनीता जोगेंद्र चौधरी, कल्याण के. विश्नोई, मधुर परिहार, प्रताप पागल, ऋतुराज पारीक, भूराराम सुथार, दिनेश गहलोत, श्रवण आदि ने भी अपनी रचनायें प्रस्तुत की। वरिष्ठ शायर व कथाकार हबीब कैफ़ी ने ग़ज़ल पेश करते हुए नौजवानों से कविता की तहज़ीब को सीखने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि राकेश मुथा ने कहा कि युवा रचनाकारों के लिए सीखना बहुत जरूरी है, सीखोगे नहीं तो आपका विकास नहीं होगा।


- सुरेन बिश्नोई