प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अप्रैल 2019
अंक -50

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल-

आइये, पधारिये
बज़्मे-दिल सँवारिये

वक़्त बेलगाम है
हौसला न हारिये

माले-मुफ़्त है वतन
लूटिये, डकारिये

आप तो हैं हुक्मरान
शेखियाँ बघारिये

हो सके तो डूबती
क़ौम को उबारिये

सो रही हों क़िस्मतें
ज़ोर से पुकारिये

उम्र अधेड़ है ज़रूर
मन न अपना मारिये


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ग़ज़ल-

जितना  भुलाना  चाहें  भुलाया  न जायेगा
दिल से किसी की याद का साया न जायेगा

वो  बेवफ़ाइयों  की  करें  कोशिशें  हज़ार
दामन वफ़ा का उनसे छुड़ाया न जायेगा

करना किसी पे तंज़ बहुत सह्ल है, मगर
मारक है किस क़दर ये बताया न जायेगा

जो भी हुआ सही कि ग़लत अपने दरमियां
उसको किताबे-दिल से मिटाया न जायेगा

मानो भी, दे दो अपनी परेशानियाँ तमाम
बारे-गिरां ये तुमसे उठाया न जायेगा

कोई भी क़ौम के तईं हो बेवफ़ा, मगर
इल्ज़ाम तो किसी पे लगाया न जायेगा

'दरवेश' अपनी ज़ात में सिमटे मिले सभी
हरगिज़ किसी से हाथ मिलाया न जायेगा


- दरवेश भारती
 
रचनाकार परिचय
दरवेश भारती

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ग़ज़ल-गाँव (2)