प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
दिसम्बर 2018
अंक -45

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

मूल्यांकन
पवित्र प्रेम की दुखद परिणति : ‘तेरा नाम इश्क’

 
 
कथा की सुन्दर बुनावट, वातावरण का सजीव चित्रण, निराली नाटकीयता, जादुई कल्पना, देश और काल का अनुसरण करता प्रांजल प्रकृति-चित्रण, पात्रों की अन्त: प्रकृति में प्रविष्ट होकर उनकी मनोदशा का सहज और मार्मिक चित्रण तथा प्रेम को बृहत परिप्रेक्ष्य के फलक पर लाकर उसके उदात्त रूप का अहसास कराने का उद्देश्य आदि के साथ-साथ पाठक को आद्योपान्त अपने पाश में बांधने की शक्ति, अजय सिंह राणा कृत उपन्यास ‘तेरा नाम इश्क’ की प्राथमिक विशेषताओं में सम्मिलित है। हिन्दी उपन्यास की कथा परम्परा के कुछ मिथकों से हटकर उप-शीर्षक, गीत तथा एक अदृश्य पात्र की रचना आदि नए प्रयोग भी इस कृति के रूप-विधान को प्रभावोत्पादक बनाते हैं। इस रचना की कथा के गर्भ में प्रेम है लेकिन लेखक ने इस मानवीय प्रेम पर जिस प्रकार देश-प्रेम को प्रतिष्ठित किया है, उसका विन्यास वैचारिक वैभव की वसुन्धरा से उपजी हृदय की कोमल भाव-शृंखला के नैसर्गिक पल्लवन के रूप में दिखाई देता है।
 
उपन्यास में प्रधान कथा-धारा के साथ-साथ अन्य सहायक कथाओं के माध्यम से लेखक ने देश व समाज की बहुत-सी दुखती नसों को भी बखूबी छुआ है। इनमें मानवता के लिए नासूर बने कश्मीर की वास्तविक व्यथा व स्थिति को सत्य-संतुलन के साथ अभिव्यंजित किया गया है। कश्मीर को स्वर्ग से नरक में परिवर्तित करने वाले कारकों में ओछी राजनीति सबसे बड़ा कारक नजर आता है। सेना पर पत्थरबाजी जैसे गद्दारी कर्म, असहाय कश्मीरी पंडितों का पलायन व उनका अमिट दर्द, आतंकवादियों की दिशाहीन पशुता व उनके द्वारा मानवाधिकारों का हनन, सेना का शौर्य और त्याग, वहाँ साधारण आदमी का घुट-घुटकर जीना-मरना आदि विषयों को प्राणवान रूप में दर्शाया गया है। 
 
नेहा, आलिया, साहिल और आशीष जैसे पात्रों के माध्यम से प्रेम के औदात्य को विरह, त्याग और संयम की आँच में तपकर उसके परिनिष्ठित आयाम तक पहुँचते देखा जा सकता है। यहाँ प्रेम के अद्भुत, रोचक, अनन्य, स्वाभाविक व पवित्र सोपानों में आलिया का आशीष के साथ, आशीष का नेहा के साथ, नेहा का साहिल के साथ तथा साहिल का नेहा के साथ व उससे भी बढक़र देश के साथ प्रेम का चित्रण उपन्यास के उद्देश्य से स्वयं ही संपृक्त हो जाता है। आज की युवा पीढ़ी विशेषकर युवतियों का निराश होकर नशे का आश्रय लेना जैसी बुराइयों तथा उनके दुष्परिणामों को कथा में पिरोकर उद्घाटित किया गया है। कोई भी रचना स्वयं में पूर्ण नहीं होती। खूबी के साथ खामी का नाभिनाल संबंध होता है। इस उपन्यास में भी स्थान-स्थान पर वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ और दार्शनिक पक्ष का अभाव अच्छे पकवान में बाल के आ जाने व नमक कम होने आदि के समान अखरता है। रोचकता, सतत जिज्ञासा, कथा का अद्भुत प्रवाह, वातावरण का सजीव चित्रण और सशक्त वस्तु-वर्णन इस उपन्यास की सबसे बड़ी ताकत है।
इस कृति की विशेषताओं को गुलदस्ते के रूप में इस प्रकार संजोया जा सकता है-‘तेरा नाम इश्क’  ऐसी प्रेम कथा है जो देश-प्रेम, मानवीय संबंध, आतंकवाद, धर्म आधारित विस्थापन, धार्मिक कट्टरता, राजनीति जनित सामाजिक व साम्प्रदायिक विद्वेष आदि अनेक ऊबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरती हुई मानवीय प्रेम के सागर में जाकर विलीन हो जाती है। रहस्यों और नाटकीयता से युक्त यह कथा हृदय को स्पर्श ही नहीं करती बल्कि पाठक की समग्र चेतना को तंरगायित करके उसे यथार्थ की कठोर भूमि से भी टकराती है। इस कथा में आत्मसम्मान व एकनिष्ठ प्रेम को अगाध विश्वास के बल पर विरह तथा त्याग की कड़ी परीक्षा की कसौटी पर कसकर अपनी मंजिल तक पहुँचते दिखाया गया है। अन्त में उपन्यास के नायक साहिल और नायिका नेहा के पवित्र प्रेम की दुखद परिणति पाठकों की सहानुभूति बटोर लेती है।
 
 
समीक्ष्य पुस्तक- तेरा नाम इश्क़
विधा- उपन्यास
समीक्षक: डॉ. अश्वनी शांडिल्य
लेखक:अजय सिंह राणा 'असर'
प्रकाशक- यूनिस्टार बुक्स 
मूल्य- रु. 250/-

 


- डॉ. अश्वनी कुमार शांडिल्य
 
रचनाकार परिचय
डॉ. अश्वनी कुमार शांडिल्य

पत्रिका में आपका योगदान . . .
मूल्यांकन (1)