प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
दिसम्बर 2018
अंक -45

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
कविता
 
जनता
 
त्यक्त्वा विकासमधुना कुरुते प्रचारं
            सम्भाषते कृषकशस्यहिताय को$यम्?
कन्याधनं वदति हन्त सुतागृहं वा
           शीघ्रं विमृश्य कवयो विलिखन्तु सर्वे।।
 
मध्यप्रदेशजनता मुदिताद्य घुष्टं
           श्रुत्वा सुनेतृमुखरैः स्वविकासमार्गम्।
नन्दन्त्यहो गणयतीव दिनानि शिष्टा-
            न्येवं दिवा सपदि पश्यति भाग्यरेखाम्।।
 
मूढा सखे सुजनता न तु वेत्ति तत्त्वं
          निश्शुल्कशब्दसुखभाग् लभते सुदुःखम्।
वाक्यैः सदा नृचतुरैः परिवञ्च्यमाना
           क्रन्दत्यहो धृतललाटकपाटपाणिः।। 
 
निश्शुल्कशब्दजसुखं ननु देशभक्तिं
           समार्जयत्यनुदिनं सुदृढां च पक्वाम्।
हा हन्त हा तदनु चेतति नैव पीता
           सम्पीडिता तु जनता लघुवित्तलब्धा।।
 
पृच्छेत् स्वनेतृजनमेव समागतं तं
           यो नाकरोत् यदवदन्मतदानकाले।
तत् पूरयेत् तदनु याचतु लज्जमानः
            तं सञ्चिनोतु सुविचार्य न चान्यमेव।।

- डॉ. अरविन्द तिवारी
 
रचनाकार परिचय
डॉ. अरविन्द तिवारी

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जयतु संस्कृतम् (2)