प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2018
अंक -44

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

आलेख
संस्कृत साहित्य में मुस्लिम लेखकों का अवदान - डॉ. अरुण कुमार निषाद 
 
संस्कृत में ही भारतीयों का जीवन रचता-बसता है | यह हमारी आत्मा की आवाज है1 भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा दोनों में से एक के अभाव में दूसरी की कल्पना आकाश कुसुम की भांति कोरी मात्र है | सत्य सनातन भारतीय संस्कृति का मूल उत्स देववाणी संस्कृत है | यह एक अमर भाषा है | हजार वर्षों से भी अधिक समय से अनेक भाषाओं को उत्पन्न करने के बाद भी यह नवीन नूतन बनी हुई है | यही कारण है कि इस भाषा ने सभी वर्गों और समुदायों को अपनी तरफ आकर्षित किया | प्रस्तुत शोधपत्र में मुस्लिम लेखकों तथा शासकों के संस्कृत में योगदान पर चर्चा की गयी है |
 
अलबरूनी –अलबरूनी प्रथम मुसलमान था जिसने संस्कृत पढ़ा | वह मुहम्मद गज़नवी का गुलाम था जो मुहम्मद गज़नवी के साथ भारत आया था | अलबरूनी ने ज्योतिष के अनेक संस्कृत ग्रन्थों का अरबी अनुवाद किया |1 ‘किताबुलहिन्द’ उसकी प्रसिद्ध रचना है | उसने ‘करणतिलक’ नामक ज्योतिष के ग्रन्थ का अरबी भाषा में अनुवाद किया जो ‘घुर्रतअज़ीज़त’नाम से प्रसिद्ध है | उसने वराहमिहिर की वृहत्संहिता का ‘अलतनज़ीनात’ नाम से फ़ारसी अनुवाद किया |2 अलबरूनी को वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, व्याकरण, दर्शन तथा धर्मशास्त्र का सम्यक् ज्ञान था | अलबरूनी मुसलमानों के मूलभूत सिद्धान्त ‘ला इलाहइल्लाह मुहम्मद उर्रसूलल्लाह’ का संस्कृत अनुवाद किया और मुहम्मद गज़नवी से इसको सिक्कों पर अंकित करने का अनुरोध किया | गज़नवी ने उसे सिक्के पर लिखवाया भी | उसका संस्कृत अनुवाद था ‘व्यक्तमेकम् अवतारमुहम्मद’ |3
 
गेसूदराज़- सूफी सन्त गेसूदराज़ का जन्म 30 जुलाई 1321 ई. को दिल्ली में हुआ था |4 इनको अरबी, फ़ारसी तथा संस्कृत का अच्छा ज्ञान था | एक अन्य सूफी सन्त मुहम्मद गौस का भी नाम मिलता का जिनको संस्कृत का ज्ञान था |
ज़ैनुल आब्दीन- कश्मीर के शासक ज़ैनुल आब्दीन संस्कृत के पण्डित थे | इन्होंने ‘योगवाशिष्ट का ‘शिकायत’ नाम से अरबी अनुबाद किया | ज़ैनुल आब्दीन के पुत्र हैदरशाह और बहराम खान को संस्कृत का ज्ञान था | उनके पौत्र को श्रीवर वृहद्कथा पढ़ते थे |5
ताजुद्दीन (ताजुलमा अली)- ताजुद्दीन (ताजुलमा अली) ने 1526 ई. में हुमायूँ को हितोपदेश का अनुवाद ‘मुफहुलकुलाव’ भेंट किया |6
इब्राहिम आदिलशाह- बीजापुर के सुल्तान इब्राहिम आदिलशाह द्वितीय (1500 -1627 ई.) ने फारसी भाषा में ‘किताबे-नवरस’ नामक ग्रन्थ लिखा जिसमें संस्कृत के शब्दों का प्रयोग है | यह संगीत और कला पर लिखित ग्रन्थ है | इसके मंगलाचरण में हिन्दू देवी-देवताओं की स्तुति है |   
शेख भवन- शेख भवन अकबर के दरबार का संस्कृत पण्डित था | उसने ‘अल्लोपनिषद्’ नामक ग्रन्थ की रचना की |7
बदायूँनी- अब्दुल कादिर बदायूँनी ने सन् 1590 ई. में रामायण का फारसी अनुवाद किया | महाभारत का भी अनुवाद बदायूँनी और शेख सुल्तान ने फैजी की सहायता से किया |इसकी एक प्रति इण्डिया आफिस आफ लाइब्रेरी में सुरक्षित है |
 
अकबर के शासनकाल में ही हाजी इब्राहिम ने शेखभवन की सहायता से अथर्ववेद का फ़ारसी अनुवाद ‘अथरबन’ नाम से किया|8
फैजी ने श्रीमद्भागवतगीता का फारसी अनुवाद ‘राज़े-ए-मग़फ़िरत’ नाम से किया |      
नाक़िब खान तथा थानेश्वर के शेख सुल्तान ने भी रामायण का फ़ारसी अनुवाद किया |   
जहाँगीर के शासनकाल में शेख सादुल्लाह उर्फ़ मसीहा ने रामायण का फ़ारसी कर जहाँगीर को भेंट किया |
निज़ाम पानीपती ने फ़ारसी भाषा में ‘कश्फुल लुगते कुलियातेयोग’ की रचना की | यह योगवाशिष्ट का फ़ारसी रूपांतरण है | 
जहाँगीर के शासनकाल में शेख सूफ़ी ने ‘योगवशिष्ट’ का ‘तोहफ़-ए-मजालिस’ (कश्फुल कुनूज) नाम से फ़ारसी अनुवाद किया|9
सन् 1631 ई. में अब्दुल रहमान ने तरजुमा-ए-गोरक्षत’ नामक ग्रन्थ की रचना की | इसमें शंकर-पार्वती का संवाद है|10
शाहजहाँ के समय अताउल्लाह रशीदी ने बीजगणित का फारसी भाषा भाषा में अनुवाद किया |
 
औरंगजेब के समय में हिम्मत खान ने राजा कामरूप और रानी कमललता की प्रेमकथा का फारसी अनुवाद किया |
अब्दुल रहमान चिश्ती ने भगवद्गीता का ‘मीर तुलमख़लूक’ नाम से फ़ारसी अनुवाद किया|11
औरंगजेब के ही शासनकाल में मिर्ज़ा फरीकुल्लाह सैफ़ खान ने ‘रागदर्पण’ और ‘रागसागर’ नामक संगीत ग्रन्थ का फ़ारसी में अनुवाद किया | इसी के शासनकल में अहमद खान अल्ब्रूल्वी ने जादू-टोना से सम्बन्धित संस्कृत ग्रन्थ का ‘मिफ्ताह-उल-फतह’ नाम ने फ़ारसी अनुवाद किया |
इब्ने मुस्तफ़ा ने पंचतन्त्र का ‘कलील दमान’ नाम से तथा खैदाद अब्बासी ने फ़ारसी भाषा में अनुवाद किया |
फखरुल्लाह ने संस्कृत ग्रन्थ ‘पोथी रागदर्पण’ का फ़ारसी भाषा में अनुवाद किया | मिर्ज़ा मुहम्मद बिन फ़खरुद्दीन ने मुहम्मद मोइजुद्दीन के लिए ‘तुहफ़तुल हिन्द’ का प्रणयन किया | जैनुल आब्दीन (कश्मीर का शासक) के आदेश पर मुल्ला अहमद ने ‘राजतरंगिणी’ का फ़ारसी अनुवाद किया | इसी ने महाभारत का फ़ारसी अनुवाद ‘तारीखे-रत्नाकर’ या तारीखेशास्त्र के नाम से किया  |12
 
अकबर के समय में अबुल फ़जल उल्लाह शीराजी ने फारसी भाषा के ग्रन्थ ‘जिन्चेउगूलखानी’ का संस्कृत अनुवाद किया |
मुहम्मदशाह- इनका प्रसिद्ध ग्रन्थ है ‘संगीतमालिका’ इसमें इन्होंने संगीत, नृत्य, कटिभेद, शिरोभेद, नृत्यभेद आदि शाखाओं और प्रभेदों का विवेचन किया है | ये तातार खान के पुत्र और फ़िरोजशाह के वंशज थे | इनका समय 13 वीं शताब्दी माना जाना है | 
दाराशिकोह- औरंगजेब का पुत्र दाराशिकोह संस्कृत का विद्वान था | उसने स्वयं के लिखे फ़ारसी ग्रन्थ ‘मजमउलबबहरैन’ का अनुवाद ‘समुद्रसंगम’ नाम से संस्कृत में किया | इसमें वेदान्त और सूफी मतों की तुलनात्मक व्याख्या है |
अकबरशाह-ये सूफ़ी सन्त (संस्कृत विद्वान) गेसूदराज के वंशज थे | इन्होंने संस्कृत में नायिका भेद पर ‘श्रृंगारमञ्जरी’ नामक ग्रन्थ लिखा | इन्हें बड़े साहब के नाम से भी जाना जाता है |
 
अब्दुलर्रहीम खानखाना- ‘खानखाना’ रहीम की उपाधि थी जिसे अकबर ने प्रदान किया था | इन्हें अरबी, फ़ारसी, तुर्की, हिन्दी, संस्कृत आदि भाषाओँ का सम्यक् ज्ञान था | इनके द्वारा लिखित एक श्लोक इस प्रकार है –
सकल    गुण    परीक्षकै   नरपति   मण्डल  वदनैक  धामा |
जयति जगति गयिमान नागा गिरिवन राजनबाब खानखाना ||
खलीफ़ा हारून-उल-रशीद ने अपने दरबार में भारतीय संस्कृत पण्डितों को आमन्त्रित किया | जहीज-इब्न-अल-उज-वियाह और इब्न-उल-नदीम ने भी संस्कृत में अपना योगदान दिया | अरब के सुल्तान ने सूर्य सिद्धान्त और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का अरबी भाषा में अनुवाद किया | अरबिक के अतिरिक्त परशियन भाषा में भी संस्कृत के ग्रन्थों का अनुवाद हुआ | 
 
संस्कृत के समकालीन मुस्लिम रचनाकार हैं -1-डॉ.आई खान (दिल्ली विश्वविद्यालय) |2-प्रो.हनीफ़ ख़ान शास्त्री(राष्ट्रिय संस्कृत संस्थान नयी दिल्ली) | इनको 2009 का राष्ट्रीय साम्प्रदायिक सद्भावना पुरस्कार प्राप्त हुआ है | इनकी रचनाएँ हैं-1.मोहन गीता 2.गीता और कुरआन में सामंजस्य 3.वेद और कुरआन से महामन्त्र गायत्री और सूराफ़ फातिहा 4.वेदों में मानवाधिकार 5.मेलजोल | 3-प्रो. सलमा महफ़ूज( अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) | 4-प्रो. ख़ालिद मुहम्मद यूसुफ़(अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) | 5-प्रो.ग़ुलाम अहमद दस्तगीर(मुम्बई) |6-स्वर्गीय पण्डित सैय्यद हुसैन शास्त्री(मलीहाबाद लखनऊ) | 7- प्रो. शरीफ़ ख़ान(अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय) | 8-प्रो. शहीदुल्लाह (ढाका विश्वविद्यालय) | 9- प्रो.कोरहान काया(अंकारा विश्वविद्यालय तुर्की) | 10-प्रो. हसन रजाई बागबीदी(तेहरान विश्वविद्यालय ईरान) |11. डॉ.मसरूर अहमद बेग (प्राचार्य जाकिर हुसैन कालेज, दिल्ली)  | 12.डॉ.मारुफ़ उर रहमान (आचार्य जाकिर हुसैन कालेज, दिल्ली) | 13.डॉ.गजाला अंसारी (राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ) |14.स्व.प्रो.किश्वर जबीं नसरीन (प्रो.इलाहाबाद विश्वविद्यालय) | 15.डॉ.हिना आरिफ़ (झाँसी) | 16.डॉ.शीनुल इसलाम मलिक (मुरादाबाद), डॉ.मुहम्मद इसराइल खां आदि लेखक-लेखिकाएँ संस्कृत में अपना योगदान दे रहें हैं | बहुत सारे ऐसे नाम अभी शेष हैं जो जानकारी में नहीं हैं और शोध का विषय हैं |
 
सारांशत: यह कहा जा सकता है कि संस्कृत साहित्य की श्रीवृद्धि में मुस्लिम लेखकों का योगदान किसी भी मामले में न्यून नहीं है | इन लेखकों को उस समय के शासकों ने भी आश्रय प्रदान किया | कुछ मुस्लिम शासक स्वयं भी अच्छे संस्कृत विद्वान थे | मुगल सम्राटों ने खासकर अकबर ने संस्कृत भाषा के लिए बहुत कार्य किया | जहाँगीर, शाहजहाँ, आसफ़ खां, बुरहान खां, शाइस्ता खां, नासिरशाह, हुसैनशाह, परागतशाह आदि ने संस्कृत की उन्नति के लिए अनेक संस्कृत पंडितों को प्रश्रय दिया |           
 

- डॉ. अरुण कुमार निषाद