प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
नवम्बर 2018
अंक -44

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

पत्र-पत्रिकाएँ
साहित्य समीर दस्तक
 
 
 
एक उत्कृष्ट पत्रिका, जिसका सम्पादन छः वर्षों से अनवरत हो रहा है। नाम है- 'साहित्य समीर दस्तक'। यह पत्रिका भोपाल से प्रकाशित होती है और इसकी सम्पादक हैं कीर्ति श्रीवास्तव। पत्रिका के हर अंक में कहानी, लघुकथा, ग़ज़ल, काव्यकुंज, शख्सियत, यादों का झरोखा, पत्रिका दर्पण, बाल जगत और अभिमत स्तम्भ रहते हैं।
 
इस बार अक्टूबर 2018 अंक के कहानी स्तम्भ में 'भाभी घर पर आ गई' (जितेंद्र निर्मोही) एक कहानी पारिवारिक पृष्ठभूमि की कहानी है और इसमें यही बताया गया है कि रिश्तों में उतावलेपन से काम नहीं चलता। बड़ी से बड़ी परेशानी सहज संवादों से हल की जा सकती है। दूसरी कहानी 'अंतिम इच्छा' (सुरभि बेहेरा) दो दोस्तों की कहानी है, जिसमें वे एक-दूसरे का सहारा बनते हैं।
 
लघुकथा 'मन्नत' (डॉ. नीना छिब्बर) बताती है कि एक वृद्ध माँ को कैसे मन्नत के बहाने उसका पुत्र मंदिर में छोड़ जाता है। यह सीख देती हुई एक मार्मिक लघुकथा है। विनम्र श्रद्धांजलि स्तम्भ में डॉ. सरस्वती माथुर, जिनके लिए कविता ही जीवन है, को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है।
 
ग़ज़ल स्तम्भ में 'इस दौर में इंसाफ़ का किरदार कोई है, मिलता है किसी और को हक़दार कोई है' (किशन स्वरूप) सरल शब्दों में बहुत ही उत्तम बात कहती है, पूरी ग़ज़ल ही बेहतरीन है। 'हर तरफ़ इक ख्व़ाहिशों की भीड़ है, जेब को अपनी मगर देखा करो' (सग़ीर अशरफ़) ग़ज़ल के भी सभी शेर बेहतरीन हैं।
 
काव्य कुंज में एक से बढ़कर एक कविताएँ हैं, जिसे बस पढ़ते ही रह जायेंगे। मंजू बंसल मुक्ता मधुश्री जी की कविता- 'आज का इंसान' के कुछ अंश उद्धृत हैं-
 
अरे मानव तू!
दो पल फुर्सत के तो निकाल
कुदरत की ख़ूबसूरती को तो निहार
अपनों के साथ कुछ समय तो बिता
फिर देख ज़िन्दगी
एक गुलिस्तां बन जाएगी
एक ख़ुशबूनुमा सफ़र बन जाएगी।
 
संस्मरण में स्तम्भ में संजय श्रेष्ठ संजु जी का संस्मरण है। शख्सियत स्तम्भ में रमेश गुप्त 'निरद' के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है। बाल जगत में बच्चों का ध्यान रखते हुए आहार संबंधी जानकारी और बाल रोचक कविताएँ दी गयी हैं। आप पत्रिका का कोई भी पहलू देखिए हर एंगल से आपको यह पत्रिका श्रेष्ठतम ही लगेगी। नवीनतम और पुरातन दोनों रचनाओं का उत्तम अनुपात दिखाई देता है। संपादक महोदया ने दिवाली पर आधारित बेहतरीन कविताओं को समावेशितकर अंक को और भी श्रेष्ठ बना दिया है। इतनी बेहतरीन पत्रिका के लिए कीर्ति जी को धन्यवाद।
यह पत्रिका आगे अनवरत यूँ ही प्रकाशित होती रहे और साहित्य की सेवा करती रहे, यही प्रार्थना है।

- सोनिया वर्मा
 
रचनाकार परिचय
सोनिया वर्मा

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