प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
सितम्बर 2018
अंक -44

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

मूल्याँकन
लघुकथा की नई नवेली बगिया 'नई सदी की लघुकथाएं'
- ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश'
 
 
लघुकथा का जन्म भारत में ही हुआ। इसका आरंभिक रूप विद्रोही था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत में उपजी कुव्यवस्था, जिसमें भ्रष्टाचार का बोलबाला होने लगा था, उसके दंश को बताने के लिए इसका उद्भव हुआ था। यानी व्यवस्था की विसंगति के इस रूप को बताने के लिए गद्य के लिए सूत्रशैली (कसावट के प्रारूप) में एक साहित्यिक विधा की ज़रूरत महसूस हुई। वह साहित्यिक विधा इस विसंगति व विद्रूपता को तीक्ष्ण रूप में कथा में पिरोकर उसे दंश के रूप में अभिव्यक्त कर सके, इसी के सूत्रपात के लिए इस विधा का विकास उस समय के प्रगतिशील साहित्यकारों ने किया था।
 
उन्होंने उस समय इस नई कथा शैली का प्रायोगिक तौर पर उपयोग किया, जिसमें देश में बढ़ती हुई रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद, पुलिस के अत्यचार, भ्रष्टाचार, दोहरे मापदंड, ज़मीनी व्यवस्था, यौन शोषण, दहेज प्रथा, जाति व्यवस्था पाखंड आदि पर इस तरह लिखा गया कि वह पाठक को सोचने, समझने और उस पर विचार करने के लिए मजबूर करे। इस शैली का पाठकों ने जमकर स्वागत किया।
 
लघुकथा, लघु कहानी के समांतर रूप में एक अलग तेवर के साथ विकसित हुई थी, जहाँ कहानी एक समस्या को समाधान के रूप में इंगित करते हुए चलती थी, वहीं इस नई शैली की कथा (लघु कहानी से अलग इस विधा) ने समस्या या विसंगति का यथास्थिति चित्रित कर के पाठकों को सोचने, समझने को विवश करने वाली शैली के रूप में अपना विकास किया। इस तरह विकसित शैली लोगों को लुभाने लगी। फलस्वरूप यह शैली लघुकथा के रूप में विकसित होती चली गई।
 
कालांतर में इसे रचनाकार साथियों ने लघु कथा से इतर एक विधा के रूप में विकसित किया, जो लघु कथा और लोककथा से लघुकथा के रूप में आगे बढ़ते हुए आज की स्थिति तक पहुंची हैं। उसी प्रारूप पर प्रकाश डालते हुए संपादकीय व भूमिका वाली यह पुस्तक 'नई सदी की लघुकथाएं' अपने विशेष रूप में सभी पाठकों के सम्मुख पूरी साज-सज्जा के साथ उपस्थित हुई है।
 
प्रस्तुत पुस्तक 'नई सदी के लघुकथाकार' की नई पीढ़ी को समर्पित होकर तीन खंडों में प्रकाशित की गई है, जिसका सम्पादन प्रसिद्ध लघुकथाकार अनिल शूर आज़ाद ने किया हैं। इस पुस्तक के प्रथम खंड में परंपरागत रूप से जुड़े लघुकथाकारों की लघुकथाओं को सम्मिलित किया गया है, जिसके अंतर्गत सूर्यकांत नागर, शंकर पुणतांबेकर, सतीश दुबे, जगदीश कश्यप, रूप देवगुण, उर्मिकृष्ण, सतीश राज पुष्करणा, कमल चौपड़ा, मधुकांत, विकेश निझावन, कमलेश भारतीय सहित अनेक लघुकथाकरों की श्रेष्ठ लघुकथाओं को इसमें सम्मिलित किया गया है।
 
द्वितीय खंड में नई सदी के लघुकथाकारों की लघुकथाएं संकलित की गई हैं, जिसमें वर्तमान के चर्चित लघुकथाकार मार्टिन जॉन, पवन जैन, सविता गुप्ता, सविता मिश्रा, पंकज शर्मा, चंद्रेश कुमार छतलानी, ज्योत्स्ना कपिल, संदीप तोमर, ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश', वीरेंद्र वीर मेहता, त्रिलोक सिंह ठकुरेला, गीता कैथल, विजयानंद विजय, विभा रानी श्रीवास्तव, जगदीश राय कुलरिया सहित अनेक लघुकथाकारों की लघुकथाएं सम्मिलित की गई हैं।
 
तृतीय खंड में 'आधुनिक हिंदी लघुकथा शोध' के नाम से विविध जानकारी पूर्ण सामग्री एकत्रित की गई है। पुस्तक की साज-सज्जा सुंदर है। फॉन्ट आकर्षक व बेहतरीन हैं। उगते हुए सूर्य के प्रकाश से अंकुरित होती हुई पौध से सज्जित आवरण पुस्तक के नाम को सार्थक करता हुआ बहुत सुंदर लगाया गया है। पुस्तक का सामग्री चयन उत्तम है। वहीं विविध लघुकथाएँ आकर्षक बन पड़ी हैं।
 
लघुकथा की भाषा लघुकथाकार के अनुरूप बेहतरीन व उपयुक्त हैं। कुशल संपादन के कारण पुस्तक त्रुटि रहित तथा बेहतर बन पड़ी है क्योंकि संकलित लघुकथाएं संपादक द्वारा आयोजित प्रतियोगिता और उसके बाद चयनित हुई लघुकथा का संकलन है। 
 
इस संकलन में प्रतिष्ठित और नवोदित लघुकथाकारों को एक साथ प्रस्तुत कर उत्तम कार्य किया है। इसके बावजूद इसमें सम्मिलित सभी लघुकथाएं अत्यंत उपयोगी हैं। इस पुस्तक की इसी उपयोगिता के कारण पाठक इसे खुले दिल से स्वागत करेंगे। इस की उपयोगिता और पृष्ठ संख्या देखते हुए दाम भी वाजिब है।
 
 
 
 
 
समीक्ष्य पुस्तक- नई सदी की लघुकथाएं
संपादक डॉ अनिल शूर आज़ाद (09871357136)
विधा- लघुकथा
प्रकाशक- नवशीला प्रकाशन, 75- श्री राम कॉलोनी निलोठी एक्सट नांगलोई , नई दिल्ली -110041 
संस्करण- प्रथम, 2018
पृष्ठ संख्या- 128
मूल्य- 200 रूपये (पेपर बेक)

- ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश
 
रचनाकार परिचय
ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश

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