प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
सितम्बर 2018
अंक -42

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

जयतु संस्कृतम्
अथ वैद्यनाथपञ्चकम्।
     
न भक्तिं विना वैद्यनाथनस्य नैव
           चिरं शान्तिसंस्थापनं  चित्तवृत्तौ।
न शक्तिर्न वृत्तिर्न न वानन्दकन्द:
            वदन्तीह के नो बुधा: हे सखाय:?1
 
न यो बिल्वपत्रं जनो वैद्यनाथ-
          कृते सञ्चिनोतीव विद्वान् विमूढ:।
स जीवन् मृतो भारतीयो ब्रवीमि
          विना वैद्यनाथं न शून्यं त्रिलोकम्? 2
 
अहो चैकमन्दारमालां विशालां
          प्रियां वैद्यनाथाय नव्यां गृहीत्वा।
लसन् पङ्क्तिमध्ये चलन् मोदमान:
          स सन्दृश्यते तत्सम: कोsत्र लोके? 3
 
न भस्माङ्कितो यस्य दिव्यो ललाटो 
           त्रिपुण्ड्रेन भव्य: स भक्तो न शैव:।
गुरुर्वैद्यनाथो न पश्यत्यभक्तं
           कृतध्नं कुलघ्नं  महापातकं तम्।4
 
न बं बं ध्वनिर्यस्य चास्यात् प्रयाति
           जयो वैद्यनाथस्य सन्मन्दिरेsस्मिन्।
पतत्येष नूनं पुनर्जन्मसिन्धौ
            कलत्रस्य वाचा परिदूयतेsसौ। 5
 
वैद्यनाथस्य भक्तेन रचितं पञ्चकं नवम्।
सर्वेषां सुखदं भूयात् कुर्वत् सन्मङ्गलं ध्रुवम्।। 6
 

- डॉ. अरविन्द तिवारी
 
रचनाकार परिचय
डॉ. अरविन्द तिवारी

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जयतु संस्कृतम् (1)