प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अगस्त 2018
अंक -43

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

उभरते स्वर
आज मंदसौर वाला रेप केस पढ़ा
बहुत दुःख हुआ।
अभी कुछ दिन पहले तो आसिफा गैंग रेप के बारे में भी पढ़ा था।
उसका क्या हुआ?
मुझे पता नहीं।
मैं बिजी हूँ।
मेरे एग्जाम चल रहे हैं।
टाइम पर सो जाती हूँ।
कल सुबह टाइम पर उठना हैं।
तैयारी करनी है।
 
यही समस्या है देश के लोगों की
उन्हें टाइम पर उठना है
और टाइम पर सोना है।
उन्हें क्या वास्ता
कुछ भी हुआ हो!
बस बहुत बुरा हुआ
कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
 
भगवान ये क्या हो रहा है?
सचमुच कलयुग है।
बच्चियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं।
बस ये कहकर
सब सो जाते हैं।
 
पोलिटिकल दंगे करवाते हैं
और लोग शामिल हो जाते हैं।
इलेशन जीत जाते हैं
और
देश!
उसका क्या हैं?
ये सब तो चलता रहेगा।
 
"डेवलपमेन्ट की बात करने वालो!
सोच में तो डेवलपमेन्ट लाओ"
 
"चाँद पर पहुँचने वालो!
धरती को तो बचा लो"
 
या फिर सो जाओ
कल सुबह जल्दी उठना हैं
काम पर जाना हैं।

- राजनंदिनी रावत
 
रचनाकार परिचय
राजनंदिनी रावत

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