प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अगस्त 2018
अंक -45

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

हायकू
हायकू
 
 
अधूरी बातें
पूरी कब हो पायीं
ढलती रातें।
 
 
पुरानी बातें
अब छोड भी दो न
सड़ी-सी यादें।
 
 
घटिया बातें
क्यूँ करते हो तुम
टूटेँगे नाते।
 
 
सोयी न रातें
करो न कुछ तुम
अच्छी-सी बातें।
 
 
बहुत बातें
करनी हैं अभी तो
तुम आ जाते।
 
 
ये कैसी बातें
हो रहीं आजकल
न जान पाते।
 
 
फिल्मी-सी बातें
और होगा भी क्या?
है आत्म घातें।
 
 
हाँ, मेरी बातें
तुम भी करते जो
ख़ुश हो जाते।
 
 
ठहरी बातें
जो तोड़ नहीं पायीं
होठों से नाते!
 
 
मान लो बातें
जो बेटी न होगी तो
सूनी बारतें।

- दिलीप वसिष्ठ
 
रचनाकार परिचय
दिलीप वसिष्ठ

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