प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
जून 2018
अंक -42

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल-

अपना हिस्सा माँग रहा हूँ
तुमको पूरा माँग रहा हूँ

दरिया ने प्यासा ही रक्खा
सो अब सहरा माँग रहा हूँ

चाँद मुक़म्मल कैसे मिलता
बस इक टुकड़ा माँग रहा हूँ

मेरी ये नादानी समझो
सबकुछ तुम-सा माँग रहा हूँ

मंज़िल की परवाह किसे है
मैं बस रस्ता माँग रहा हूँ

हक़गोई में आसानी हो
ऐसा लहजा माँग रहा हूँ


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ग़ज़ल-

बेज़ुबां ज़िन्दगी नहीं अच्छी
ये तेरी ख़ामुशी नहीं अच्छी

तीरगी हाथ की कमाई है
मुफ़्त की रौशनी नहीं अच्छी

दुश्मनी में शऊर है बेशक
पर तेरी दोस्ती नहीं अच्छी

कुछ लहू की सजावटें कर लो
इस तरह शायरी नहीं अच्छी

दर ख़ुदा का तलाश कर लेना
हर जगह बंदगी नहीं अच्छी


- नीरज कुमार निराला
 
रचनाकार परिचय
नीरज कुमार निराला

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ग़ज़ल-गाँव (1)