प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मई 2018
अंक -45

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

ग़ज़ल-गाँव

ग़ज़ल-

आदमी देवता नहीं होता
पाक दामन सदा नहीं होता

कब, कहाँ, क्या गुनाह हो जाये
ये किसी को पता नहीं होता

काम का बस जुनून चढ़ जाये
उससे बढ़कर नशा नहीं होता

टूटकर हम बिखर गये होते
साथ गर आपका नहीं होता

जब तलक आँख नम न हो जाये
हक़ ग़ज़ल का अदा नहीं होता


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ग़ज़ल-

जिनके जज़्बे में जान होती है
हौसलों में उड़ान होती है

जो ज़माने के काम है आती
शख़्सि‍यत वो महान होती है

सबको क़़ु़दरत ने बोलियाँ दी हैं
आदमी के ज़़ुबान होती है

ये परिन्दे भी जाग जाते हैं
भोर की जब अज़ान होती है

सब किताबें हैं बाद में, पहले
भूख की दास्तान होती है


- डॉ. डी एम मिश्र
 
रचनाकार परिचय
डॉ. डी एम मिश्र

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ग़ज़ल-गाँव (1)