प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मई 2018
अंक -43

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

पत्र-पत्रिकाएँ

धर्म, आध्यात्म, संस्कृति, कला, दर्शन जैसे साहित्य से समृद्ध 'आदिज्ञान'
- कृष्ण सुकुमार



हाल ही में मुंबई प्रवास के दौरान 'आदिज्ञान' त्रैमासिक पत्रिका के यशस्वी और अनुभवी सम्पादक आदरणीय श्री जीतसिंह चौहान साहब से रामदेव पार्क, भायंदर स्थित उनके मुंबई आवास पर भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। चौहान साहब एक बेहद सरल, सादा, मिलनसार और आत्मीयता से लबालब इंसान हैं! यह जानकर मुझे और भी ख़ुशी हुई कि अपने बचपन से मुंबई में आ बसे जीतसिंह जी मूलतः सरसावा के हैं और उनकी अर्धांगिनी मूलतः रूड़की की हैं और वे भी उतनी ही सरल, स्नेही और आत्मीय हैं!

जीतसिंह जी से मेरा परिचय तो बहुत पुराना है, 30-35 वर्ष पूर्व से, जब कभी वे 'सुमनलिपि' पत्रिका निकालते थे (जिसमें मेरी रचनाएं भी प्रकाशित होती रही हैं), लेकिन आमने-सामने  की इस सुखद भेंट का यह पहला सुअवसर रहा!
जीतसिंह जी के संदर्भ में अद्भुत लेकिन साहसिक बात यह है कि धर्म, आध्यात्म, संस्कृति, कला, दर्शन जैसे साहित्य को लेकर वे 'आदिज्ञान' जैसी पत्रिका को बड़े परिश्रम से नितांत अकेले अपने सीमित आर्थिक साधनों के बल पर निरंतर निकाल रहे हैं! कोई चंदा नहीं, कोई सदस्यता का आग्रह नहीं!
मैं उनकी इस निष्ठा और लगन को आत्मीय प्रणाम करता हूँ। हृदय से मेरा साधुवाद और शुभकामनाएं।


'आदिज्ञान' का प्रस्तुत अंक अप्रैल-जून 2018 पूर्व अंकों की तरह ही पठनीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सामग्री से समृद्ध है। इस अंक के विभिन्न लेखों में एक ओर जहाँ भारतीय संस्कृति में अभिवादन, स्वस्तिक, होलिका, गुरू का स्थान, देवी देवताआें के प्रतीकात्मक पशु-पक्षी संबंधों जैसे ज्ञानवर्धक विषयों के अर्थ और महत्व पर चिंतन किया गया है, वहीं दूसरी ओर अनहद नाद स्तंभ के अंतर्गत बालकवि बैरागी और विनोद सोमानी हंस जैसे साात आठ कवियों की आध्यात्म विषयक काव्य रचनाओं को भी स्थान दिया गया है।

यही नहीं, जहाँ श्रीमद्भगवद्गीता और रामायण जैसे कालातीत ग्रंथों पर दो पृथक लेखों में चिंतनपरक सामग्री प्रस्तुत की गयी है, वहीं मुस्लिम संस्कृति में जिहाद के अर्थ और सरोकारों पर भी सम्यक् चिंतन किया गया है। एक लेख में जहाँ हिंदू दृष्टि को मनुष्यता के पक्ष में विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है वहीं एक अन्य लेख 'मनुर्भव' भी मनुष्यता की पक्षधरता का ही समर्थन करता है।

एक अन्य दिलचस्प लेख में फिल्मी गीतों में जीवन दर्शन तलाशने का प्रयास है। प्रेमसाधना, शिव और गायत्री पर भी महत्वपूर्ण सामग्री को स्थान दिया गया है। इसके अतिरिक्त आध्यात्मिक यात्रा, जनोपयोगी पुस्तकों का परिचय तथा विभिन्न गतिविधियों पर रपट जैसे स्तंभ भी महत्वपूर्ण हैं।




पत्रिका का विवरण
पता- बी 1204, राज होराइजन बिल्डिंग, निकट आकाश निधि, रामदेव पार्क रोड, भायंदर (पूर्व), मुंबई- 401105
फोन- 022-28103854


- कृष्ण सुकुमार
 
रचनाकार परिचय
कृष्ण सुकुमार

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