प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मई 2018
अंक -38

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

लघुकथाएँ

उफ़ ये गर्मी


दफ़्तर से घर लौटी रमा सूरज के तीखे तेवर के कारण पसीने की बूंदों से तर-बतर थी। उसने तुरंत अपनी नौकरानी रुक्मणी को आवाज़ देते हुए कोल्ड चॉकलेट मिल्क शेक बनाने को कहा। गर्मी से गर्म हुई रमा अब भी अकेले बोले ही जा रही थी- "उफ़ ये गर्मी ने तो सारा शरीर का रंग ही काला कर दिया है। गर्मी में तो इंडिया में रहना ही नहीं चाहिए।"
यह सब बातें सुनकर पास बैठी सात साल की बेटी सोनू बोल पड़ी- "मम्मा! हमारे घर में तो ए.सी. है, फिर भी हमें इतनी गर्मी लग रही हैं तो सामने (खिड़की में इशारा करते हुए) वो अंकल (मज़दूर) कैसे काम करते होंगे?"

यह सुनकर रमा सोनू को देखती रह गई।



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स्वच्छ भारत

सभा को संबोधित करते हुए नेताजी ने कहा- "हमें न्यू इंडिया बनना है। स्वच्छ भारत निर्माण हमारा ध्येय है। किसी भी प्रकार की गंदगी हम नहीं फैलने देंगे। कूड़े-करकट का नामो-निशान नहीं रहने देंगे। भारत को सुंदर बनाने के लिए हम जान तक दे देंगे। नेताजी की बात सुनकर मंत्रमुग्ध हुई जनता ने तालियों का पहाड़ खड़ा कर लिया। संबोधन समाप्त होते ही नेताजी मंच के कोने में मुँह में भरे मसाले को थूकते हुए चल दिये और नेताजी द्वारा बाँटे गये नाश्ते के पैकेट में से नाश्ते को भूख लगी दीमक की तरह साफ कर खाली पैकेट को जनता इधर-उधर फेंककर चलती बनी।

मंच के नेपथ्य में खड़ी गांधी की मूर्ति अब मुस्कुरा रही थी।


- देवेंद्रराज सुथार
 
रचनाकार परिचय
देवेंद्रराज सुथार

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कथा-कुसुम (1)