प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
अप्रैल 2018
अंक -43

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

फिल्म समीक्षा
हि च्च... च्च... की हिचकी कोई विद्यार्थी खराब नहीं होता, खराब या अच्छे शिक्षक होते हैं! की बानगी फ़िल्म: हिचकी 

 
 
2014 में आई फ़िल्म ‘मर्दानी’ के चार साल बाद रुपहले पर्दे पर वापसी करने वाली रानी मुखर्जी की वापसी तो सशक्त, दमदार, बेहतरीन कही जा सकती है किन्तु ब्लैक जैसा जादू 2005 के बाद बिखेरने में वे अभी तक नाकामयाब हुई हैं । फ़िल्म हिचकी में मात्र रानी मुखर्जी “नैना” के माध्यम से उसे पूरी तरह से जीती नजर आती है । फिल्म के पहले दृश्य से लेकर आखिरी दृश्य तक दर्शकों को फ़िल्म देखने के लिए सफ़ल और कभी-कभी असफ़ल प्रयास करती नजर आती है लेकिन कुल मिलाकर इसे औसत ही कहा जा सकता है । खुशी, गम, बेइज्जती, हंसी के मिश्रित भाव जो उन्होंने पेश किए हैं उनकी तारीफ तो  की ही जा सकती है।
 
फिल्म की कहानी मुंबई की रहने वाली नैना माथुर (रानी मुखर्जी) की है जो कि ‘टूरेट सिंड्रोम’ से जूझ रही है । जिसकी वजह से वह रुक-रुककर बातचीत कर पाती है और बीच-बीच में च्च... च्च... वा... वा... जैसी अजीब सी आवाजें निकालती रहती हैं । अच्छी खासी पढ़ाई करने के बावजूद भी नैना एक टीचर की जॉब करना चाहती है जिसके लिए वह लगभग 18 से अधिक अलग-अलग स्कूल में अप्लाई भी करती है । काफी कोशिशों के बाद उन्‍हें अपने ही आखिरी स्‍कूल में नौकरी मिलती है जहाँ उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी की थी । यहीं के एक शिक्षक खान सर ने कभी उनकी झिझक और हीन भावना से उन्‍हें आजाद किया था तथा सामान्‍य और नियमित छात्र होने का सम्‍मान दिया था । स्कूल की एक मजबूरी की वजह से स्‍कूल में नौकरी मिल जाती है । दरअसल मजबूरी यह है कि ,उस स्‍कूल के 9 एफ के बच्‍चे किसी भी टीचर को स्कूल में टिकने ही नहीं देते । उन बच्‍चों को उस स्‍कूल में ‘शिक्षा के अधिकार’ के तहत एडमिशन तो मिल गया है, लेकिन स्‍कूल के दूसरे शिक्षक उन्‍हें हेय दृष्टि से देखते हैं । यह समस्या रानी मुखर्जी उस क्लास के 14 बच्चे जो बहुत ही शरारती हैं और उनकी वजह से कोई भी टीचर ज्यादा दिनों तक उस स्कूल में टिक नहीं पाता, उन्हें परफेक्ट स्टूडेंट बना देती है । जैसे ही नैना उन बच्चों की क्लास में जाती है बच्चे उसकी बोलने की स्टाइल का मजाक उड़ाने लगते हैं । पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगाते और तरह-तरह से नैना माथुर को परेशान करते हैं ताकि वे स्कूल छोडक़र चली जाएं । कहानी में निर्देशक ने कई ट्विस्ट डाले हैं, जिनमें से एक नैना के स्कूल छोडऩे का भी है।
 
फिल्म का निर्देशन भी स्तरीय ही है । सिद्धार्थ पी० मल्होत्रा ने आठ साल बाद निर्देशन में वापसी की है । जैसा निर्देशन वैसी ही उसकी एडिटिंग है । 118 मिनट लम्बी इस फिल्म में गानों के अलावा कुछ एक दृश्य ठूंसे  हुए से या अनचाहे लगते हैं । कहानी ठीक-ठाक और प्रेडिक्टेबल है और साथ ही यह फ़िल्म हॉलीवुड की एक फ़िल्म 'फ्रंट ऑफ दक्लास' (2008) की कॉपी भी बताई जा रही है । चूँकि मैं भारतीय सिनेमा का फैन हूँ तो अँगुलियों पर गिनने लायक भी हॉलीवुड की फ़िल्में नहीं देखीं हैं । फिल्म में जसलीन रॉयल का संगीत फिल्म को गति तो प्रदान करता है किन्तु रैप आदि बनाकर उन्हें फ़िल्म में ठूंसना ऐसे लगता है मानो गाने न भी रखे जाते तब भी फ़िल्म की कहानी चल सकती थी । इसीलिए फिल्म का संगीत सामान्य है और कुछेक गाने अच्छे होने के बावजूद भी दर्शक कोई भी  गाना गुनगुनाते हुए थिएटर से बाहर नहीं निकलते । 
 गीत कहानी के संग-संग चलते हैं । पूरी फिल्म को स्कूल व कुछ आउटडोर शूट पर फिल्माया गया है । इतने सबके बाद भी वर्ष 2018 की तिमाही में कुछ बेहतरीन फिल्में देखने को मिली हैं, जिनमें रानी मुखर्जी की ‘हिचकी’ भी शामिल की जा सकती है है।  फिल्म का बजट लगभग 20 करोड़ रुपए बताया गया जिसमें से कि 12 करोड़ रुपए प्रोडक्शन कॉस्ट और 8 करोड़ रुपए फिल्म के मार्केटिंग और प्रमोशन में लगाए गए । फिल्म के सैटेलाइट राइट्स सोनी टीवी और डिजिटल राइट्स एमेजॉन प्राइम को पहले ही बेचे जा चुके हैं। 
 
लीक से हटकर फिल्मों की कड़ी में 'हिचकी' आकर्षित जरुर करती है । अभिनय की बात करें, तो रानी की एक्टिंग जरुर दिल जीत लेती है । बात करते-करते गर्दन झटकने वाले किरदार से रानी दर्शकों को बांधने में कामयाब रही हैं । फिल्म में सपोर्टिंग रोल में हर्ष मयर, सचिन पिलगांवकर, सुप्रिया पिलगांवकर ने अपना काम बखूबी किया है । हालांकि, क्लाइमेक्स थोड़ा और मजेदार ट्विस्ट और टर्नस् डालकर अच्छा हो सकता था ।  बतौर टीचर रानी ने स्टूडेंट्स के साथ बॉन्डिंग को पर्दे पर बखूबी पेश किया है । फिल्म का फर्स्ट हाफ बेहद निराशाजनक और उबाऊ सा होने के साथ-साथ कोई रोमांच दिलों में नहीं जगाता किन्तु सेकेंड हाफ में ट्विस्टस् के कारण कहानी की रफ्तार कुछ तेज होती है और फ़िल्म में एक रफ्तार जो होनी चाहिए थी वह नजर आने लगती है । इस फ़िल्म को देखते हुए अगर ‘हिप हिप हुर्रे’, ‘दसवीं फ’, ‘चॉक एंड डस्टर’, ‘तारे ज़मीन पर’ या ‘थ्री इडियट’ जैसी फ़िल्मों का स्मरण हो आए तो यह स्वाभाविक है । शिक्षा और शिक्षा प्रणाली को बड़े पर्दे पर हमारे यहाँ कई बार दिखाया गया है । वैसे भी आज के दौर में हमारी शिक्षा प्रणाली और शिक्षा पद्धति पर सवाल भी खूब उठते हैं और उस पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत भी है। 
 
 
फिल्म- हिचकी 
निर्देशक- सिद्धार्थ पी० मल्होत्रा  
निर्माता-आदित्य चोपड़ा
सितारे- रानी मुखर्जी, हर्ष मयर, नीरज कबी, कुणाल शिंदे, आसिफ बसरा, शिव सुब्रह्मण्यम, सचिन और उनकी पत्नी सुप्रिया पिलगांवकर आदि । 
रेटिंग - ढाई स्टार

 


- तेजस पूनिया