प्रज्ञा प्रकाशन, सांचोर द्वारा प्रकाशित
मार्च 2018
अंक -38

प्रधान संपादक : के.पी. 'अनमोल'
संस्थापक एवं संपादक: प्रीति 'अज्ञात'
तकनीकी संपादक : मोहम्मद इमरान खान

पत्र-पत्रिकाएँ

त्रैमासिक 'शीतल वाणी'
सम्पादक- डॉ. वीरेंद्र आज़म

 



सहारनपुर के जाने-माने, प्रतिबद्ध और प्रखर पत्रकार एवं कवि डॉ. वीरेंद्र आज़म को मैं एक जुझारू और कर्मठ व्यक्तित्व के रूप में पहचानता हूँ। सन् 1981 में साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को केंद्र में रखकर उन्होंने 'शीतल वाणी' साप्ताहिक निकालना शुरू किया, जिसे बाद में पाक्षिक करना पड़ा। कुछ अपरिहार्य कारणों से इसका प्रकाशन बाधित भी हुआ किन्तु अनेक संघर्षों और रुकावटों को झेलने के बावजूद साहित्यकार और कलाप्रेमी श्री आर. पी. शुक्ल (सहारनपुर के पूर्व मंडलायुक्त) की निरंतर प्रेरणा और प्रोत्साहन स्वरूप इसका प्रकाशन वर्ष 2007 में पुनः आरम्भ हुआ और 2012 में रजिस्ट्रेशन, जिसके पश्चात अपने त्रैमासिक रूप में इसका प्रकाशन अनवरत जारी है।

क्या आप जानते हैं, पाठकों से पत्रिका की सदस्यता के लिए बग़ैर किसी आग्रह के चलते, मात्र निजी संसाधनों के बल पर नियमित निकलने वाली इस पत्रिका की विशेषता क्या है? जानने के लिए यह समझना ज़रूरी है कि सम्पादक ने प्रारम्भ ही से अपने अथक परिश्रम के साथ इस लघु पत्रिका के एक से बढ़ कर एक बेजोड़ और वज़नदार विशेषांक हिंदी जगत को प्रदान किये हैं। विशेषांकों का यह क्रम 1981 में रंगमंच विशेषांक से शुरू हुआ, जिसका लोकार्पण हिन्दी के सुप्रसिद्ध  समालोचक और नाट्य-समीक्षक श्री नेमीचंद जैन के हाथों संपन्न हुआ था। वर्ष 2010 के आसपास होली विशेषांक और बाल विशेषांक भी निकाले गये। इसके बाद तो सर्वश्री उदयप्रकाश, से रा यात्री, शमशेर बहादुर सिंह, नरेश सक्सेना, कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, कमला प्रसाद, डॉ. द्वारिका प्रसाद सक्सेना, डॉ. लक्ष्मी नारायण लाल जैसे हिंदी साहित्य के पुरोधाओं पर भव्य विशेषांक आते रहे। इन विशेषांकों में सम्बन्धित लेखक की रचनाओं की समग्रता और गहनता से पड़ताल की गयी है और उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर शोधपूर्ण लेख और संस्मरण सम्मिलित किये गए हैं। इसलिए ये विशेषांक न सिर्फ़ शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए बल्कि आम पाठक के लिए भी बहुत महत्व के बन पड़े हैं, जो कि उक्त रचनाकारों और उनकी रचनाओं को एक नयी दृष्टि से समझने की दिशा में हमारे सहायक हैं।

आपको जानकार गर्व होगा कि 'शीतल वाणी' को वर्ष 2017 से यू.जी.सी. के जर्नल्स में भी शामिल कर लिया गया है। यही नहीं एक और ताज़ा ख़ुशख़बरी यह भी कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी बोर्ड की ओर से ग़ैर सरकारी और सामाजिक-सांस्कृतिक और साहित्यिक पत्रिकाओं को प्रोत्साहन देने की एक योजना के अंतर्गत भी 'शीतल वाणी' को रु. 25000/- का प्रोत्साहन पुरस्कार घोषित किया गया है, जो 20 फरवरी 2018 को दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में प्रदान किया गया। इस हेतु पत्रिका के यशस्वी सम्पादक श्री वीरेंद्र आज़म को हम सबकी आत्मीय बधाई और शुभकामनाएं!

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इस पत्रिका की मुक्तकंठ से प्रशंसा करने वालों में एक ओर जहाँ पद्मश्री गोपाल दास नीरज जी हैं, जिन्होंने पत्र लिखकर द्वारिका प्रसाद सक्सेना विशेषांक को अपने आशीषपूर्ण वचनों से उपकृत किया, वहीं डॉ. श्याम सिंह शशि, डॉ. कमल किशोर गोयनका, विष्णु नागर, गंगा प्रसाद विमल, जगदीश व्योम, माहेश्वर तिवारी, ओम निश्छल, कृष्ण चंद्र गुप्त, स्वप्निल श्रीवास्तव, भारत भूषण, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के उदय प्रताप सिंह, सुधीर विद्यार्थी, प्रेम कुमार, अश्वघोष, विज्ञान व्रत, कमलेश भट्ट कमल, कृष्ण शलभ, संजीव बक्शी, जय प्रकाश मानस, डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण',  भरत प्रसाद, अरुण सीतेश, प्रेमचंद गाँधी, डॉ. सुधा उपाध्याय, प्रो. शबनम राठी, योगेंद्र दत्त शर्मा (ग़ाजियाबाद), अशोक मिश्र, महामंडलेश्वर मारतण्ड पुरी, बलदेव कृष्ण कपूर, कुँअर शेखर विजेंद्र (शोभित यूनिवर्सिटी), पवन कुमार (आइ.ए.एस.), बंधु कुशावर्ती (लखनऊ), अरविंद श्रीवास्तव, डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ, श्री अशोक अंजुम, श्री मोहन श्रोत्रिय ने भी भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए पत्रिका को निरंतर प्रोत्साहन दिया है। शमशेर बहादुर सिंह विशेषांक पर इंडिया टुडे द्वारा समीक्षा किया जाना भी पत्रिका के लिए एक उपलब्धि है।

फिलहाल 'शीतल वाणी' का जनवरी- 2018 अंक आपके सामने है। प्रस्तुत अंक में भी हिंदी जगत के हाल ही में दिवंगत तीन महत्वपूर्ण दिग्गजों का बड़ी आत्मीयतापूर्वक पुण्यस्मरण करते हुए उन्हें भावांजलि दी गयी है-- तीसरा सप्तक के कवि पद्मभूषण श्री कुंवर नारायण, पौराणिक कथाओं व पात्रों को आधुनिक संदर्भों में अपनी कहानियों और उपन्यासों में जीवित करने वाले श्री मनु शर्मा और बाल साहित्य के शिखर रचनाकार श्री कृष्ण शलभ। इन पर लिखे आलेखों की विशेषता यह है कि ये पाठक और रचनाकार के बीच एक आत्मीयता स्थापित करते चलते हैं और 'अकैडमिक' किस्म के आलेखों वाली बोरियत बिलकुल पैदा नहीं करते, क्योंकि सबकुछ बहुत भावपूर्ण कलम से निकला हुआ है।

इसके साथ ही अंक में श्री सुरेश सपन और श्री कमलकांत बुधकर द्वारा क्रमशः  कृष्ण शलभ जी और त्रिलोचन जी का भावांजलिस्वरूप पुण्यस्मरण किया गया है। व्यक्तित्व स्तम्भ में विज्ञान व्रत और जयप्रकाश कर्दम द्वारा क्रमश: डॉ. अश्वघोष और डॉ. एन. सिंह के कृतित्व और व्यक्तित्व पर रोचक और सार्थक आलेख हैं। इसके अतिरिक्त यह अंक कहानी, ग़ज़लों, कविताओं, दोहों, लघुकथाओं, शोध-लेखों, पुस्तक समीक्षाओं, अनेक पत्र-पत्रिकाओं के परिचय और विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों के रिपोर्टों से भी सुसज्जित है।

शीतल वाणी के संपादक श्री वीरेंद्र आज़म को हृदय से साधुवाद, बधाई और शुभकामनाओं के साथ।






पता- शीतल वाणी, 2 सी/755, पत्रकार लेन, प्रद्युम्न नगर, मल्हीपुर रोड, सहारनपुर (उ.प्र.)-247001
ई मेल- [email protected]  एवं [email protected]


- कृष्ण सुकुमार
 
रचनाकार परिचय
कृष्ण सुकुमार

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